राजेश कुमावत, इन्डी रिपोर्टर
जयपुर. आराध्य देव गोविंद देवजी मंदिर में वैशाख माह ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन दोपहर में ठाकुरजी को 15 मिनट ही जल विहार करवाया। रियासत कालीन चांदी के फव्वारे से ठाकुर जी को शीतलता प्रदान की गई। दौरान ठाकुरजी को सूती वस्त्र की धोती धारण कराई।
खास बात यह है कि कुछ साल पूर्व तक वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा से एक महीने तक जलविहार की झांकी होती थी, जिसमें एक घंटे भगवान को जलविहार कराया जाता था। लेकिन अब भक्तों को पानी बचाने का संदेश देते हुए विशेष तिथि और उत्सव पर ही जलविहार की झांकी बजायी जायेगी।
इसका समय भी एकादशी और ज्येष्ठाभिषेक के अलावा महज 15 मिनट निर्धारित किया गया है। दोपहर 12:30 से 12:45 बजे तक ठाकुरजी की जल यात्रा निकाली जाएगी। ठाकुर जी के जलयात्रा उत्सव का जल मंदिर के पीछे जय निवास उद्यान की ओर छोटे नाले से निकलता है। लोग नाले के नीचे बैठकर स्नान करते हैं और इस जल को बोतल में भरकर घर ले जाते हैं।
जलयात्रा के दौरान तरबूज, आम, जामुन, लीची, फालसे सहित अन्य ऋतु फल अर्पित किए जाएंगे। वहीं, खस और गुलाब के शरबत का भी भोग लगाया जाएगा। ठाकुर जी को दक्षिण भारत से मंगवाए गए चंदन का लेप कर रियासत कालीन चांदी के फव्वारे से शीतलता प्रदान की गई।
ठाकुरजी को जलविहार कि सेवा 22 जून ज्येष्ठाभिषेक तक की हि की जाएगी।
मंदिर के प्रवक्ता मानस गोस्वामी ने बताया कि पानी की बचत का संदेश देते हुए श्री राधा गोविन्द देवजी को वैशाख पूर्णिमा के अवसर पर मात्र 15 मिनट ही जल यात्रा कराई ।
