पवन शर्मा,inditeporter.com
पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने आखिर सच्चाई कह दी की पार्टी को नुकसान स्वार्थी लोगों के कारण है , नेताओं की चापलूसी और शब्द मसाज से कुछ लोग पार्टी को नुकसान कर रहे हैं।
पार्टी कार्यालय में मुख्यमंत्री को कमरा आवंटित किए जाने के बाद हुए इस पहले कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने खुद के बाद पुत्र और परिवार को आगे बढ़ाने वाले सिस्टम पर खुलकर कहा !
भाजपा में जी भाई साहब, प्रणाम भाई साहब, चाय फीकी लेंगे भाई साहब, रोटी मल्टीग्रेन आटे की बनवा दे भाई साहब, सब्जी में सेंधा नमक ठीक रहेगा भाई साहब, दूध तो गाय का ठीक रहेगा भाई साहब, सब्जी बिना दवाई की खेत वाली बनवा दे भाई साहब.. वाले लोगों का ही बोलबाला है।
और यही कारण है कि कार्यकर्ता ने बोलना बंद कर दिया है और पार्टी गलत दिशा में बहुत तेजी से आगे बढ़ रही है.! अब श्यामा प्रसाद मुखर्जी और दीनदयाल जी के लगाए पेड़ पर सत्तारुपी फल तो आए हैं, लेकिन फलों को अंदर से खाने वाले कीड़े पेड़ पर कब्जा कर चुके हैं और जिन कार्यकर्ता रूपी बागवान ने बगीचे को सींचा था वह बाहर खड़ा बेबस सब देख रहा है।
कार्यकर्ताओ आंखों में आंसू है, दिल में दर्द है, लेकिन जुबान पर अनुशासन के नाम पर शासन का ताला है. चिंतित हर कार्यकर्ता है, लेकिन यही सब चलता रहा तो भाजपा का भविष्य क्या होगा !
पहले भाजपा यदि किसी कार्यक्रम में 100 लोगों को बुलाती थी तो 20 लोग आते थे!
2013 यह संख्या 40 हो गई थी।
जब 2014 में केंद्र में भाजपा सरकार बनी तो यह संख्या ….
100 में 30 से बढ़कर 60/70 हो गईं!
2014 में भाजपा सरकार के कुछ दिनों बाद से कार्यक्रम में 100 से बढ़कर बिन बुलाए 500 आने लगा!
और
उसके बाद इस भीड़ में जो शुरुआत में 20 लोग आते थे वह बेचारे सबसे पीछे पंक्ति में पहुंच गए !
और जो बाद के नए 480 थे वह इतना सक्रिय दिखते हैं जैसे इनके बाप दादा जनसंघ के समय के संस्थापक सदस्य रहे हो।
और वह 20 बेचारे शांत होकर घर बैठ गए।
क्योंकि नए आयातित भाजपाई की तरह वह नौटंकी कर नहीं सकते..?

शानदार, कड़वा सच है।