राजेश कुमावत , indireporter.com
कौन बनेगा राजस्थान भाजपा का नया प्रदेश अध्यक्ष? राजपूत, गुर्जर, मीणा या जाट – जातीय समीकरण पर फंसा पेंच
जयपुर। राजस्थान भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष की दौड़ सबसे चर्चित और सनसनीखेज मोड़ पर आ गई है। दिल्ली से लेकर जयपुर तक नामों पर मंथन चल रहा है, लेकिन इस बार फैसला सिर्फ नाम का नहीं, बल्कि जातीय समीकरण का होगा।
1. राजपूत चेहरे में सबसे बड़ा उलटफेर
अब तक राजपूत समाज से पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ का नाम सबसे आगे माना जा रहा था, लेकिन सूत्रों की मानें तो इस दौड़ में उन्हें पछाड़कर नया नाम तेजी से उभरा है – श्रवण सिंह बगड़ी का।
श्रवण बगड़ी के पक्ष में सबसे बड़ा फैक्टर यह बताया जा रहा है कि वे मुख्यमंत्री और संगठन महामंत्री दोनों के खास माने जाते हैं। संगठन में पकड़ और सरकार में सीधी पैठ के कारण बगड़ी का नाम अब राठौड़ से आगे निकलता हुआ दिख रहा है।
2. कांग्रेस के सचिन पायलट की काट कौन?
भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती कांग्रेस के सबसे लोकप्रिय चेहरे सचिन पायलट की टक्कर में एक मजबूत गुर्जर चेहरा खड़ा करना है। इसी रणनीति के तहत गुर्जर समाज से दो नामों की जोरदार चर्चा है –
ओमप्रकाश भडाणा और अनीता गुर्जर। दोनों ही गुर्जर समाज में अच्छी पकड़ रखते हैं और पूर्वी राजस्थान में भाजपा को मजबूती दे सकते हैं।
गुर्जर को अध्यक्ष बनाया तो मीणा नाराज!
भाजपा का असली संकट यहीं से शुरू होता है। अगर पार्टी गुर्जर नेता को प्रदेश अध्यक्ष बनाती है, तो मीणा समुदाय में नाराजगी तय मानी जा रही है। पूर्वी राजस्थान की कई सीटों पर मीणा-गुर्जर वोट बैंक का सीधा टकराव है और एक को खुश करने पर दूसरा नाराज हो सकता है।
तो फिर जाट कार्ड ?
इसी उलझन से बचने के लिए पार्टी जाट समुदाय पर भी दांव खेल सकती है, जिससे पश्चिमी राजस्थान साधा जा सके।
कुल मिलाकर भाजपा के लिए नया प्रदेश अध्यक्ष चुनना किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है – एक जाति को साधो तो दूसरी बिगड़ने का डर। अब देखना यह है कि दिल्ली का हाईकमान राजपूत, गुर्जर, मीणा, जाट में से किस जातीय कार्ड पर अंतिम मुहर लगाता है।
