राजेश कुमावत, indireporter.com
जयपुर। समान सिविल संहिता प्रारूप समिति के सदस्यों सामाजिक कार्यकर्ता शुची चौहान , रामस्वरूप अग्रवाल, वरिष्ठ एडवोकेट बसंत सिंह छाबा, वरिष्ठ आईएएस अधिकारी भास्कर ए सावंत सहित अन्य सदस्यों के साथ मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को UCC बिल का ड्राफ्ट सौंपा। समिति ने इसे राज्य में लागू करने की सिफारिश की है। UCC यानी सभी धर्मों के लिए शादी, तलाक, संपत्ति, गोद लेना और विरासत के लिए एक जैसा कानून।
UCC से क्या फायदे हो सकते हैं
1. एक देश – एक कानून: धर्म, जाति के आधार पर अलग-अलग पर्सनल लॉ खत्म। सबके लिए शादी-तलाक-विरासत के नियम समान होंगे।
2. महिलाओं को बराबरी: तीन तलाक, हलाला, बहुविवाह जैसी प्रथाओं पर रोक। बेटे-बेटी को संपत्ति में बराबर अधिकार। तलाक और गुजारा भत्ते के नियम सभी के लिए एक जैसे।
3. कानूनी प्रक्रिया आसान: अभी हर धर्म का अलग कानून होने से कोर्ट में भ्रम होता है। UCC से जजों के लिए फैसला करना और आम लोगों के लिए केस लड़ना आसान होगा।
4. राष्ट्रीय एकता: संविधान के अनुच्छेद 44 में भी UCC का जिक्र है। इससे “समान नागरिक संहिता” का विचार मजबूत होगा और सामाजिक भेदभाव कम होगा।
5. लिव-इन और गोद लेने में पारदर्शिता: लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन और गोद लेने के नियम भी तय होंगे, जिससे धोखाधड़ी रुकेगी।
UCC से क्या नुकसान/चुनौतियां हो सकती हैं
1. धार्मिक भावनाएं आहत: कई समुदाय इसे अपने धार्मिक रीति-रिवाजों में दखल मानते हैं। मुस्लिम पर्सनल लॉ, हिंदू मैरिज एक्ट जैसी परंपराओं में बदलाव का विरोध हो सकता है।
2. आदिवासी समुदाय पर असर: संविधान की 5वीं और 6वीं अनुसूची वाले क्षेत्रों में आदिवासियों की अपनी रीति-रिवाज हैं। उन्हें UCC से बाहर रखने की मांग उठ रही है, वरना उनकी संस्कृति प्रभावित होगी।
3. राज्य की सामाजिक विविधता: राजस्थान में अलग-अलग समाजों की शादी-ब्याह और संपत्ति की परंपराएं अलग हैं। एक जैसा कानून लागू करना जमीनी स्तर पर मुश्किल हो सकता है।
4. कानूनी उलझन: अभी तक केंद्र ने भी पूरे देश में UCC लागू नहीं किया है। राज्य स्तर पर लागू करने पर कोर्ट में चुनौतियां आ सकती हैं।
5. जबरन एकरूपता का डर: आलोचकों का कहना है कि “विविधता में एकता” के बजाय यह “एकरूपता थोपना” बन जाएगा।
ड्राफ्ट CM को मिलने के बाद इसे कैबिनेट में चर्चा के लिए रखा जाएगा। फिर विधानसभा में बिल लाकर पास कराना होगा। उत्तराखंड के बाद राजस्थान दूसरा राज्य बन सकता है जो UCC लागू करने वाला।
