जितेंद्र शर्मा, indirepoter
” नीम के पेड़ की चोटी पर बागडा बाबा के बालो की कटिंग”
नाटय निर्देशक : पेड़ बचाने और पर्यावरण के संदेश के लिए किया अपराध : जीतेन्द्र शर्मा
जयपुर में एक तरफ जब प्रचंड गर्मी में दोप्रहर के समय सड़के सुन्नी हो, करीब 50 डिग्री के तापमन कि उबलती धूप मे जयपुर के कुछ रंगकर्मी नीम के पेड़ पर चढ़ जाते है,
शुभ विचार संस्था जयपुर की नाटय मण्डली के बैनर पर संगीतमयनाटय के शोधकर्ता व रंगकर्मी जीतेन्द्र शर्मा द्वारा निर्देशित और परिकल्पित ” नीम के पेड़ की चोटी पर बागड़ा बाबा के बालों की कटिंग” का नाटय मंचन सीतापुरा स्थित शेक्षणिकक्षेत्र में हुआ , नाटय इतिहास में यह पहला अवसर था जब कोई नाटक पेड़ पर ही सेट लगाकर खेला गया है।
नाटक की कहानी : बुजुर्ग बागड़ा बाबा खेत से काम कर के दोप्रहर 12 बजे अपने घर आता है, जहां उनके दोनों बेटे (मुकेश ,राहुल) घर मे लगाए गए पेड़ को काट रहे होते है। बागड़ा बाबा दोनों को पेड़ काटने के लिये रोक देते है, इस बात से दोनो बेटे क्रोधित हो कर बाबा को कहते है कि आप शरीर को गर्मी कम लगे इसलिए माथे के बालों की कटिंग आज करवाते हो वैसे ही धरती माँ को भी गर्मी से राहत दिलाने कें लिये पेड़ो की कटिंग जरूरी करनी चाहिए, जैसे हमारे माथे पर बाल है वैसे ही धरती पर पेड़ है उनको काटना जरूरी है , दोनों बेटों को बागड़ा बाबा समझाते है। लेकिन दोनो बेटे बाबा को डांटते और गाली देते है,
अपमानित बागड़ा बाबा दोप्रहर की प्रचंड तेज धूप में 12 बजे घर से निकल कर गाँव के नाई के पास पहुँच जाता है,जहां नाई को 100 रुपये अधिक का लालच का दे कर गाँव के बीच लगे नीम के पेड़ की चोटी पर बैठ कर सिर के बालों को कटवाते है। यह दृश्य नीचे खड़े लोग देखते है तो बागड़ा बाबा लोगो को संदेश देते है की “गाँव वालों पेड़ पर अपने बालों की कटिंग भले ही करवालो लेकिन पेड़ो को मत काटो।
दूसरी तरफ बाबा के पेड पर चढ़ते देख कर कुछ लोग इस को आत्महत्या का मामला मानकर इस कि सूचना सरकार के मुख्य सचिव को दे देते है। और बागड़ा बाबा के दोनों बेटे भी 100 नीम के पेड़ लगाने का प्रण लेते है यही नाटक का समापन होता है।
नाटक में मुख्य भूमिकाओं में अभिनय जीतेन्द्र बागड़ा ,रामप्रसाद शर्मा , गजेंद्र सेन, मुकेश कुमार मीना,राहुल चोधरी,राजेश शर्मा ,प्रिया शर्मा,जानकीवल्लभ शर्मा,मुनेश सिंह चौहान,केशव भड़ाना, बाल कलाकार शुभम,आरुष,दर्शील आदी ने किया।
रंगकर्मीयो ने पेड़ लगाने का लिया प्रण : नाटक के बाद नाटय निर्देशक और सभी कलाकारों ने प्रण लिया कि बरसात के समय में सब मिलकर 100 से अधिक नीम के वृक्ष लगाएंगे
