राजेश कुमावत, indireporter.com
एक तरफ तो सरकार मानसून में करोड़ों पौधारोपण कर प्रकृति बचाने का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर सरकारी इकाई रीको विकास के नाम पर हरे वृक्षों की कटाई कर रही है।
डोल का बाढ़ वन कट रहा हैं। उसको बचाना हैं, “वन है तो हम हैं” RIICO झूठ बोल कर जैव विविधता को नष्ट कर रहा हैं ।
जयपुर, आज डोल का बाढ़ जंगल को बचाने के लिए चल रहे आंदोलन के संदर्भ प्रेस वार्ता आयोजित की गई, पूर्व फॉरेस्ट अधिकारी DFO देवेंद्र भारद्वाज के मार्गदर्शन में हुई वृक्ष गणना के प्रमुख निष्कर्ष पत्रकारों के साथ साझा किए गए।
वृक्ष गणना करने वाली टीम ने पीएम यूनिटी मॉल की ज़मीन पर 203 पेड़ों की पहचान की है, जिनमें से 14 पेड़ पूरी तरह विकसित खेजड़ी के हैं – जो राजस्थान का राजकीय पेड़ भी है। सभी पेड़ों को जियो-टैग किया गया है। यह आंकड़ा रीको के उस दावे के बिल्कुल उलट है जिसमें कहा गया था कि वहां सिर्फ़ 38 पेड़ हैं।
आंदोलन की बात करते हुए हमने एक वैकल्पिक विकास योजना भी पेश की है, जिसमें यह परियोजना डोल का बाढ़ जैसी पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील भूमि से हटाने का सुझाव है। यह योजना वास्तुकारों, पर्यावरणविदों, पारिस्थितिकी विशेषज्ञों और अन्य पेशेवरों की मदद से तैयार की गई है।
मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, उद्योग मंत्री, मुख्य सचिव और रीको अध्यक्ष जैसे प्रमुख अधिकारियों से मुलाकात की थी, लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है। ड़ोल का बाढ़ समिति के आशुतोष रांका ने कहा कि श्री राज्यवर्धन राठौड़ के अनुरोध पर, समिति ने एक विस्तृत ‘बायोडायवर्सिटी पार्क’ की योजना भी सौंपी थी, लेकिन उसका भी जवाब नहीं आया। इस क्षेत्र की जैव विविधता को रेखांकित करते हुए पक्षी एवं पर्यावरण प्रेमी कोमल श्रीवास्तव ने कहा, “हमने इस इलाके में पाए जाने वाले सभी पक्षियों को डॉक्युमेंट किया है। यहां की पारिस्थितिकी बहुत समृद्ध और संवेदनशील है, जिसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।”
प्रेस कॉन्फ्रेंस में रीको के ठेकेदारों द्वारा हाल ही में की गई पेड़ों की कटाई पर भी चर्चा हुई। पेड़ों की छंटाई के नाम पर रीको ने अंधाधुंध कटाई शुरू कर दी है। चूंकि रीको ने आधिकारिक रूप से केवल 38 पेड़ों को ही दर्ज किया है, इसलिए बाकी सभी पेड़, खासकर खेजड़ी खतरे में हैं। पास की ज़मीन पर बनने वाले फिनटेक पार्क के लिए दोबारा वृक्षारोपण की योजना बनाई गई है,
जंगल में जो हरे वृक्षों की कटाई हुई, उसके बाद डोल का बाढ़ ने तत्काल विरोध और धरने की अपील की। इसके जवाब में आज सुबह 8 बजे से ही 200 से ज्यादा जागरूक नागरिक साइट पर पहुंचे – जो इस आंदोलन में जनता के समर्थन का एक सशक्त उदाहरण है। ड़ोल का बाढ़ समिति के लोगों की मांग है तत्काल कुंज क्षेत्र में पेड़ों की कटाई पर रोक लगाई जाए, और उनके द्वारा प्रस्तुत वैकल्पिक विकास प्रस्ताव पर गंभीरता से चर्चा कर कोई समाधान निकाला जाए। उन्होंने कहा कि वे अपने प्रयासों में दृढ़ हैं, और रीको द्वारा की जा रही तेजी से कटाई के अनुसार ही तेजी से और मजबूती से जवाब देना जारी रखेंगे।
