दीपक शर्मा, indireporter.com
पाली में आस्था का कुंभ आरंभ, साधना, यज्ञ, भैरव कथा में उमड़े श्रद्धालू
– जगद्गुरू श्री वसंत विजयानंद गिरी जी महाराज के सानिध्य में आध्यात्मिक महा महोत्सव
पाली। अंचल की खुशहाली, समृद्धि के लिए कृष्णगिरी पीठाधीश्वर जगद्गुरू पूज्यपाद श्री वसंत विजयानंद गिरी जी महाराज की पावन निश्रा में पाली के अणुव्रत नगर ग्राउंड पर शनिवार को नौ दिवसीय आध्यात्मिक कुंभ का शुभारंभ पौराणिक परम्परा और विधि विधान से हुआ।
प्रातः से ही साधना शिविर स्थल के बाहर श्रद्धालुओं की कतारें लगना शुरू हो गई थी। जैसे ही ढोल नगाडों के साथ जगद्गुरू देव का आगमन हुआ, महोत्सव परिसर गुरूदेव की जयजयकार से गूंज उठा। गुरूदेव श्री वसंत विजयानंद गिरी जी महाराज द्वारा साधना स्थल पर विराजित देवी देवताओं की पूरे विधान के साथ पूजा अर्चना की। इस के बाद साधना में उपस्थित श्रद्धालुओं को साधना के रहस्यों के बारे में बताया गया। कई श्रद्धालुओं के हाथों में समृद्धि को आकर्षित करने वाले जीबू कॉइन, पायरेट लक्ष्मी यंत्र थे, जिन्हें सिद्ध करने की प्रक्रिया आरंभ की गई। गुरूदेव द्वारा उच्चारित मंत्रों का महत्व बताया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं को कष्ट निवारक चमत्कारी उपाय भी गुरुदेव ने बताये।
दोपहर पश्चात जगद्गुरू श्री वसंत विजयानंद गिरी जी महाराज द्वारा काशी के 51 पंडितों की उपस्थिति में महालक्ष्मी महायज्ञ विधि विधान से आरंभ करवाया गया। यज्ञ की प्रत्येक आहुति गुरूदेव के श्रीमुख से उच्चारित दुर्लभ मंत्रों के साथ दी जा रही थी। यज्ञ में विधि अनुसार समस्त देवी देवताओं का आव्हान किया गया। करीब ढाई घंटे तक प्रथम दिवस का यज्ञ चला। गाय के शुद्ध देसी घी, लाल, पीले, सफेद चंदन, ओषधियों, दुर्लभ जड़ी बूटियों, जिन देवता को जो पसंद है उस सामग्री सहित दिव्य वस्तुओं की हजारों आहुतियां दी गई। रात्रि में गुरूदेव के श्रीमुख से श्रद्धालुओं ने तन्मय होकर भैरव कथा का श्रवण किया।
समृद्धि कलश आकर्षण का केंद्र–
यज्ञ शाला में समृद्धि को आकर्षित करने वाले 1008 समृद्धि कलश आकर्षण का केंद्र हैं। यह कलश नवरात्रि महा महोत्सव यज्ञ अनुष्ठान इंदौर और उदयपुर में करोड़ों आहुतियों और लाखों कुंकुमार्चन से सिद्ध हैं। कलश के भीतर 32 उपरत्न, 32 हीलिंग जेम स्टोन, पंच धातु के साथ नव रत्न, 154 दुर्लभ औषधियां, 11 करोड़ मंत्रों से सिद्ध दिव्य पंचमुखी रुद्राक्ष, 1 करोड़ जप से सिद्ध कुमकुम, दक्षिणवर्ती शंख, रत्न का कछुआ, स्फटिक श्री यंत्र, कुबेर यंत्र, वास्तु यंत्र, लक्ष्मी यंत्र, गोमती चक्र, विष्णु चक्र, कस्तूरी, गोरोचन, दस लाख आहुति से सिद्ध दिव्य भस्म, रक्षा पोटली, वास्तु पिरामिड, आदि वस्तुएं हैं। यह कलश लक्ष्मी महायज्ञ में पुनः सिद्ध हो रहे हैं।
पांडाल में अष्ट भैरव और मां लक्ष्मी के विभिन्न स्वरूपों के दर्शन–
कथा पांडाल में भैरव के अष्ट रुपों और मां लक्ष्मी, पद्मावती के विभिन्न स्वरूपों की विशाल प्रतिमाएं श्रद्धालुओं को मोह रही हैं।
कई राज्यों से जुटने लगे भक्त-
नौ दिवसीय आध्यात्मिक महोत्सव में शामिल होने विभिन्न राज्यो से भक्तों के आने का सिलसिला जारी है। राजस्थान के दूरदराज क्षेत्रों के अलावा, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, उत्तरप्रदेश, हरियाणा, पंजाब, गुजरात आदि राज्यों से भक्त परिवार आये हैं और यह सिलसिला जारी है। लगातार इस दिव्य भव्य महोत्सव में भीड़ जुटती जा रही है।
