राजेश कमावत, indireporter.com
जयपुर के विश्वकर्मा औद्योगिक क्षेत्र में गैस संकट के कारण मजदूरों पर बढ़ता आर्थिक भार, प्रशासन-से की गई मुलाकात |
15 अप्रैल 2026 को श्रमिक पैरवी व अधिकार केंद्र जयपुर व पीयूसीएल के सदस्यों ने प्रवासी मजदूरों के बीच बढ रही एलपीजी गैस की किल्लत, अन्नपूर्णा रसोइयों का श्रमिक कॉलोनियों मे न होना एंव खाद्यान दलहन मे बढ़ती महंगाई को लेकर मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, राजस्थान सरकार व संदेश नायक-जयपुर जिला कलेक्टर, प्रियव्रत सिंह चारण-जिला रसद एंव आपूर्ति अधिकारी जयपुर से मुलाकात की गई व ज्ञापन दिया गया |
श्रमिक पैरवी व अधिकार केंद्र जयपुर व पीयूसील राजस्थान को मानना था राजस्थान सरकार भारत सरकार के एलपीजी गैस को लेकर बिल्कुल भी गंभीर नहीं है और कोई भी योजना नहीं लागू हो रही है | ना पेट्रोल पम्प में पहचान पत्र दिखा कर छोटू गैस सिलिन्डर 340 रुपये में प्राप्त करना, ना कोई वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है |
जूझ रहा ह माध्यम से गैस जिससे न केवल उनके स्वा अतिरिक्त समस्याओं क यह अत्यंत चिंताजनक है कि अब तक इन श्रमिकों को सूखा राशन उपलब्ध नहीं कराया गया है और न ही क्षेत्र में अन्नपूर्णा रसोई का संचालन किया जा रहा है। इस स्थिति में श्रमिक वर्ग भुखमरी एवं असुरक्षा के संकट से जूझ रहा है।
जिला कलेक्टर संदेश नायक ने कहा की वह जरूर गैस की आपूर्ति को लेकर नोडल एजेंसी इंडियन ऑइल से बात करेंगे और DSO के ज़रिये कोशिश की जाएंगे की महंगी गैस पर छापा मारी की जाये | साथ ही अन्नपूर्ण रसोई को लेकर उन्होंने को कोई आश्वासन नहीं दिया, हालांकि वह संगठनों का मानना था उसे सबसे प्राथमिकता पर लिया जाना चाहिए था | सस्ता, दाल तेल व अनाज को लेकर उनका कहना था की वह पॉलिसी मैटर हैं और राज्य सरकार को तय करना होगा |
मुख्य सचिव श्री वी श्रीनिवास ने हमें आश्वासन दिया की वे जरूर गैस की किल्लत को लेकर बात करेंगे और सस्ता दाल, तेल के पैकेट पर भी विचार करेंगे | अन्नपूर्ण रसोई को लेकर जब हमने ज़ोर दिया की 84 रसोई केंद्र जयपुर के लिए बहुत ही कम हैं और उनको बढ़ाना चाहिए, खास तौर से विश्वकर्मा, सांगानेर, सीतापुरा इलाकों में |
