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ओम पर्वत पर सूर्य कि पहली किरण के साथ गणेश, शिव, त्रिशूल, नदी, शेषनाग, आदि के होते हैं “अद्भुत दर्शन “

Rajesh Kumawat
Last updated: June 14, 2026 1:05 pm
Rajesh Kumawat Published June 14, 2026
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कैलाशी नंदकिशोर शर्मा, indireporter.com

ओम पर्वत पर सूर्य कि पहली किरण पड़ने पर सुनहरे चमकदार दर्शन के साथ साथ, गणेश, शिव, त्रिशूल, नन्दी, शेषनाग आदि के अदभुत दर्शन

14 जून 2026 आदि कैलाश और ओम पर्वत की धार्मिक यात्रा पर आए कैलाशी नंदकिशोर शर्मा को बाबा के आशीर्वाद से ओम पर्वत पर ऊं के साथ साथ गणेश, शिव ,त्रिशूल, नदी ,शेषनाग, आदि के आलौकिक दर्शन देखने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।

कैलाशी नंदकिशोर शर्मा ने बताया कि ओम पर्वत उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में भारत-नेपाल-तिब्बत सीमा पर स्थित एक रहस्य मयी और पवित्र पर्वत है। जिसमें शिव सपरिवार रहते हैं बाबा के आशीर्वाद से और सच्चे मन से भक्ति करने वाले भक्तों को ओम के साथ साथ गणेश, शिव, त्रिशूल,नन्दी आदिकि आकृतियां दिखाई देती हैं।
धारचूला से 87 किमी दूर, नाभीढांग/नावीढांग के पास, व्यास घाटी में स्थित है यह
समुद्र तल से ऊंचाई 6,191 मीटर यानी 20,312 फीट। दर्शन स्थल नाभीढांग 13,000 फीट से ओम पर्वत के दर्शन होते हैं। यह भारत-तिब्बत सीमा पर स्थित है। इसके नजदीकी गांव गुंजी, नाभी, कुटी, रोंगकॉन्ग है

इसका ओम पर्वत” इसलिए पड़ा।क्योंकि इस पर्वत की चोटी पर साल भर जमी रहने वाली बर्फ पर प्राकृतिक रूप से संस्कृत का ‘ॐ’ यानी “ओम” अक्षर उभरता है। यह आकृति मानव निर्मित नहीं है, पूरी तरह प्राकृतिक है। बर्फ पिघलने पर भी चट्टानों पर ‘ॐ’ का आकार बना रहता है। इसी वजह से इसे “ओम पर्वत” कहा जाता है। नेपाल में इसे “छोटा कैलाश” भी कहते हैं।

कैलाशी नंदकिशोर शर्मा ने बताया ओम पर्वत पर भगवान शिव का निवास है कि यहां भगवान शिव स्वयं ‘ॐ’ के रूप में सपरिवार विराजते हैं। ‘ॐ’ ब्रह्मांड की मूल ध्वनि है।
ओम पर्वत के आसपास 8 छोटे बड़े पहाड़ हैं जो अष्ट कमल दल की तरह दिखते हैं। बीच में ओम पर्वत शिवलिंग जैसा लगता है।
मानसरोवर से जुड़ाव के बारे में स्थानीय मान्यता है कि आदि कैलाश और कैलाश मानसरोवर के साथ मिलकर ये तीनों मिलकर एक दिव्य त्रिकोण बनाते हैं।
पांडव काल मे पांडवों ने स्वर्गारोहण के समय यहां से ओम पर्वत के दर्शन किए थे।

. ओम पर्वत के पर्वत की चोटी पर बर्फ से बना ‘ॐ’ साफ दिखता है। नीचे काली-स्लेटी चट्टानें और ऊपर सफेद बर्फ है समय सुबह सूर्य की पहली किरण पड़ने पर ‘ॐ’ सुनहरा चमकता है।
मौसम और बर्फ के अनुसार ‘ॐ’ की आकृति थोड़ी बदलती रहती है, पर मिटती कभी नहीं।

ओम पर्वत के पास के पवित्र स्थल पार्वती ताल,गौरी कुंड* नाभीढांग में ही मानसरोवर जैसा पवित्र कुंड। इसमें ओम पर्वत का प्रतिबिंब दिखता है
कालापानी 15 किमी पहले काली नदी का उद्गम स्थान के साथ साथ काली माता ,शिव , हनुमान मंदिर भी है
वेद व्यास गुफा कुटी गांव में कहते हैं महर्षि वेद व्यास ने यहीं तप किया था
शेष नाग पर्वत शेषनागऔर नागो के फन जैसी आकृति वाला पर्वत भी हैं

चट्टानों के कटाव और बर्फ के जमाव से ये ‘ॐ’ की आकृति बनी है। लेकिन सदियों से आकृति का न मिटना इसे चमत्कारिक बनाता हैं ऊंचाई 13,000 फीट पर ऑक्सीजन कम होती है। मौसम कभी भी बारिश-बर्फबारी हो सकती है।

मौसम साफ हो तभी ‘ॐ’ दिखता है। बादल होने पर नहीं दिखता।

जो सच्चे मन से ओम पर्वत के दर्शन कर लेता है, उसके सारे पाप कट जाते हैं और उसे कैलाश मानसरोवर के समान पुण्य मिलता है। इसीलिए इसे “कैलाश मानसरोवर का विकल्प” भी कहते हैं।

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