राजेश कमावत. Indireporter.com
अनोखी शादी बनी सामाजिक समरसता की मिसाल, सात फेरों से पहले अनाथ बच्चों का किया स्वागत, प्रेमपूर्वक कराया सहभोज
दूल्हा-दुल्हन ने विवाह की खुशियों को जरूरतमंद बच्चों के साथ बांटकर दिया मानवता और समानता का संदेश
एक ओर जहां शादियों में भव्य सजावट, महंगे आयोजन और दिखावे पर खूब खर्च किया जाता है, वहीं एक अनोखे विवाह समारोह में दूल्हा-दुल्हन ने सामाजिक समरसता और मानवता की ऐसी मिसाल पेश की, जिसने हर किसी का दिल जीत लिया।
इस विवाह समारोह में दूल्हा-दुल्हन ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ सात फेरे लेने से पहले गरीब एवं अनाथ बच्चों को विशेष रूप से आमंत्रित कर उनका आत्मीय स्वागत किया। इसके बाद सभी बच्चों को सम्मानपूर्वक बैठाकर प्रेम और अपनत्व के साथ सहभोज कराया गया।
इस दौरान बच्चों के चेहरों पर खुशी और उत्साह देखते ही बन रहा था। दूल्हा-दुल्हन ने स्वयं बच्चों के बीच पहुंचकर उनका स्वागत किया और उन्हें यह एहसास कराया कि समाज में कोई भी व्यक्ति छोटा या बड़ा नहीं होता। हर इंसान को समान सम्मान और प्रेम मिलना चाहिए।
इसके पश्चात विवाह की अन्य रस्में संपन्न हुईं और दूल्हा-दुल्हन ने सात फेरे लेकर जीवनभर साथ निभाने का संकल्प लिया।
इस अनूठी पहल के माध्यम से नवदंपती ने यह संदेश दिया कि विवाह केवल दो व्यक्तियों और दो परिवारों का मिलन नहीं, बल्कि समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को निभाने का भी अवसर है। खुशियां तभी सार्थक होती हैं, जब उनमें जरूरतमंद और वंचित वर्ग के लोग भी सहभागी बनें।
समारोह में मौजूद लोगों ने दूल्हा-दुल्हन की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन समाज में भेदभाव मिटाने, आपसी भाईचारा बढ़ाने और सामाजिक समरसता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
सात फेरों से पहले अनाथ बच्चों के चेहरों पर मुस्कान लाकर इस नवदंपती ने यह साबित कर दिया कि शादी की असली खुशी केवल उत्सव मनाने में नहीं, बल्कि दूसरों की खुशियों का कारण बनने में है।
