By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept

Indi Reporter (Hindi)

|| India & Beyond: Stories Shaping Our World

Notification Show More
Font ResizerAa
  • Home
  • जयपुर
  • राजस्थान
  • भारत
  • विदेश
  • अपराध
  • खेल
  • राजनीति
  • शिक्षा
  • सकारात्मक खबर
  • संपादकीय
Reading: विरासत से वैश्विक पहचान तक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गांव
Share
Font ResizerAa
Indi Reporter (Hindi)Indi Reporter (Hindi)
  • व्यापार
  • राजस्थान समाचार
  • अपराध समाचार
  • भारत समाचार
  • सकारात्मक खबर
  • भोजन & जीवनशैली
  • मनोरंजन
  • पर्यावरण
  • राजनीति
  • शिक्षा
Search
  • Home
  • Categories
    • अपराध समाचार
    • खेल
    • जयपुर समाचार
    • तकनीकी
    • धार्मिक समाचार
    • पर्यावरण
    • भारत समाचार
    • भोजन & जीवनशैली
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • राजनीति
    • दुनिया की राजनीति
    • भारतीय राजनीति
    • राजस्थान समाचार
    • विज्ञान
    • विश्व समाचार
    • व्यापार
    • अर्थव्यवस्था
    • भारत व्यापार
    • विश्व व्यापार
    • शेयर बाजार
    • शिक्षा
    • सकारात्मक खबर
    • संपादकीय
    • स्वास्थ्य
  • Bookmarks
    • Customize Interests
    • My Bookmarks
Have an existing account? Sign In
Follow US
Indi Reporter || India & Beyond: Stories Shaping Our World Sites > Indi Reporter (Hindi) > Blog > धार्मिक समाचार > विरासत से वैश्विक पहचान तक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गांव
धार्मिक समाचारपर्यावरणभारत समाचारभोजन & जीवनशैलीविश्व समाचारसकारात्मक खबर

विरासत से वैश्विक पहचान तक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गांव

Rajesh Kumawat
Last updated: September 25, 2025 2:08 pm
Rajesh Kumawat Published September 25, 2025
Share
SHARE

डॉ. ईश्वर बैरागी , indireporter.com

वडनगर, 25 सितम्बर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गांव गुजरात का वडनगर आज वैश्विक मानचित्र पर तेजी से उभर रहा है। अपने हजारों साल पुराने इतिहास और सांस्कृतिक धरोहरों के कारण वडनगर चर्चा में है। यहां की गलियों से लेकर मंदिरों और स्थापत्य कला तक में वह प्राचीनता झलकती है, जो भारत की सांस्कृतिक यात्रा की गवाह रही है।

वडनगर का इतिहास लगभग ढाई हजार वर्ष पुराना माना जाता है। पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की खुदाई में यहां से सातवीं से ग्यारहवीं शताब्दी तक के बौद्ध विहारों और मठों के अवशेष मिले हैं। इसके अलावा यहां की प्राचीर और किलाबंदी दर्शाती है कि यह नगर मध्यकाल में एक समृद्ध व्यापारिक और धार्मिक केंद्र था। प्राचीन ग्रंथों में भी वडनगर का उल्लेख मिलता है। यह नगर उत्तर गुजरात की सांस्कृतिक राजधानी के रूप में विख्यात था, जहां से व्यापार मार्ग भी गुजरते थे।

हिंदू, जैन और बौद्ध धर्म से जुड़ाव
वडनगर की खासियत यह है कि यह केवल एक धार्मिक परंपरा तक सीमित नहीं रहा। यहां हिंदू धर्म के प्राचीन मंदिर जैसे हाटकेश्वर महादेव मंदिर आज भी श्रद्धा का केंद्र हैं। इसी प्रकार जैन धर्म के सुंदर मंदिर नगर की धार्मिक विविधता का परिचय देते हैं। यहां खुदाई में बौद्ध मठ, स्तूप और आभूषणों के अवशेष मिले हैं, जो बताते हैं कि यह नगर बौद्ध भिक्षुओं का महत्वपूर्ण ठिकाना रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वडनगर को अब बौद्ध सर्किट से जोड़ा जा रहा है। स्थानीय गाइड मलय त्रिवेदी के अनुसार वडनगर की खासियत इसकी बहुलता है। यहां हिंदू मंदिर, जैन मंदिर और बौद्ध मठ साथ-साथ देखने को मिलते हैं। यही इसे अद्वितीय बनाता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़ाव
वडनगर का नाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कारण विश्व स्तर पर जाना जाने लगा। मोदीजी ने अपने बचपन का एक बड़ा हिस्सा यहीं बिताया। वडनगर रेलवे स्टेशन पर उन्होंने अपने पिता के साथ चाय बेची थी। यही वजह है कि यह नगर अब ‘मोदी का गांव’ कहकर पहचाना जाता है।
प्रधानमंत्री स्वयं कई बार वडनगर आ चुके हैं। 2017 में जब उन्होंने यहां रोड शो किया था, तो पूरे शहर ने ऐतिहासिक स्वागत किया। मोदी के जीवन से जुड़ी यह धरती अब देश-विदेश के पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन चुकी है।

केंद्र और राज्य सरकार दोनों वडनगर को पर्यटन और हेरिटेज हब के रूप में विकसित कर रही हैं। वडनगर को बौद्ध सर्किट में शामिल किया गया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों का आना बढ़ रहा है। यहां रेलवे स्टेशन का कायाकल्प किया गया है और उसे ऐतिहासिक स्वरूप दिया गया है।
नगर की झीलों, किलों और मंदिरों के संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। गुजरात सरकार ने वडनगर में हेरिटेज वॉक की व्यवस्था की है, ताकि पर्यटक इतिहास और संस्कृति को नजदीक से जान सकें। मलय त्रिवेदी का कहना है कि आज वडनगर में बड़े स्तर पर विकास कार्य हो रहे हैं। सरकार इसे हेरिटेज टाउन बनाने की दिशा में काम कर रही है। आने वाले समय में यह देश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शुमार होगा।

वडनगर की इमारतों को हेरिटेज लुक दिया जा रहा है। पुराने मकानों का जीर्णोद्धार कर उनकी ऐतिहासिक सुंदरता को बनाए रखने की कोशिश हो रही है। नगर के प्रवेश द्वार और तोरण द्वार को विशेष रूप से संवारकर पर्यटन का केंद्र बनाया गया है। रेलवे स्टेशन, जहां कभी छोटे से प्लेटफॉर्म पर नरेंद्र मोदी अपने पिता के साथ चाय बेचा करते थे, अब आधुनिक सुविधाओं से युक्त है, लेकिन उसकी पुरानी आत्मा को सहेजकर रखा गया है। यही संयोजन वडनगर को आधुनिकता और परंपरा में संतुलन बनाता है।

वडनगर की पहचान तोरण द्वार
वडनगर की सबसे बड़ी धरोहरों में तोरण द्वार का नाम प्रमुख है। सोलंकी काल में बने ये द्वार आज भी अपनी कला और स्थापत्य के लिए प्रसिद्ध हैं। इनकी नक्काशी और डिजाइन गुजरात की समृद्ध शिल्प परंपरा का उदाहरण हैं। आज इन्हें ‘वडनगर की पहचान’ कहा जाता है।

वडनगर धीरे-धीरे अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर अपनी जगह बना रहा है। यहां बौद्ध भिक्षुओं की विरासत देखने चीन, जापान, श्रीलंका और अन्य देशों के पर्यटक आते हैं। साथ ही मोदीजी से जुड़ा होने के कारण देशभर से लोग यहां पहुंचते हैं। मलय त्रिवेदी बताते हैं “अभी यहां रोजाना बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं। वडनगर का माहौल बदल चुका है। यह गुजरात ही नहीं, पूरे भारत की धरोहर है।”


You Might Also Like

लोकतंत्र के चौथे स्तंभ “वरिष्ठ पत्रकारों” का किया सम्मान

आदर्श विद्या मंदिर के छात्र “आर्यन डंगायच” रहे सर्वश्रेष्ठ, 47 श्रेष्ठ छात्रों एवं गरुजनों का हुआ सम्मान

डॉ. संजय सिंह को मिला अंतरराष्ट्रीय RCVS अवार्ड, 20 हजार से अधिक किये सफल ऑपरेशन

लक्षिता शुक्ला ने लक्ष्य किया हासिल, उपलब्धि का श्रेय विद्यालय एवं परिवार को

बालिका शिक्षा को मिलेगा बढ़ाव, कन्या महाविद्यालय भवन का लोकार्पण

Share This Article
Facebook Twitter Email Print
Leave a comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Follow US

Find US on Social Medias
FacebookLike
TwitterFollow
YoutubeSubscribe
TelegramFollow

Weekly Newsletter

Subscribe to our newsletter to get our newest articles instantly!

[mc4wp_form]
Popular News
जयपुर समाचारपर्यावरणभारत समाचारभोजन & जीवनशैलीमनोरंजनयात्राराजनीतिराजस्थान समाचारविश्व समाचारशिक्षासकारात्मक खबर

‘लिटरेचर फेस्टिवल’ की तर्ज पर “the ढूढाड़ talks” राष्ट्रीय सत साहित्य सम्मेलन की होगी धूम

Rajesh Kumawat Rajesh Kumawat December 5, 2024
UN में भारत के प्रहार से चित्त हुआ चीन, UNSC के ढुलमुल रवैये पर भी की तगड़ी चोट
भारत विकास परिषद की ओर से छात्रों का अभिनंदन
शुभ विचार की ओर से मणिकर्णिका घाट पर देखिए चिताओं के बीच नाटक” शमशान घाट”
बांग्लादेश आंदोलन की आड़ में हिंदुओं का “सर्वनाश” भारत सरकार खामोश

Categories

  • राजनीति
  • व्यापार
  • भारत
  • विश्व समाचार
  • Science
  • राजस्थान
  • अपराध समाचार
  • सकारात्मक समाचार

About US

Indi Reporter aims to be your go-to destination for staying informed about the latest developments, trends, and stories that matter most.
Quick Links
  • About Us
  • Contact Us
  • Privacy policy
  • Terms of use
Quick Links
  • Support Us
  • Join Us
  • Advertisement
  • Editorial

Subscribe US

Subscribe to our newsletter to get our newest articles instantly!

[mc4wp_form]
© Indi Reporter. All Rights Reserved.
Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?