राजेश कुमावत, indireporter.com
अजमेर शरीफ दरगाह पर ख्वाजा गरीब नवाज (र.अ) के 813वें उर्स मुबारक के अवसर पर भारतीय सर्वधर्म संसद के राष्ट्रीय समन्वयक महर्षि भृगु पीठाधीश्वर गुरुजी गोस्वामी सुशील महाराज के नेतृत्व में एक प्रतिष्ठित प्रतिनिधिमंडल ने दरगाह पर हाजिरी दी।
ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह पर चादर पेश की और देश में एकता, सामंजस्य और वैश्विक शांति की दुआ की।
दरगाह अजमेर शरीफ के गद्दी नशीन हाजी सैयद सलमान चिश्ती और चिश्ती फाउंडेशन के अध्यक्ष ने प्रतिनिधिमंडल का गर्मजोशी से स्वागत किया और सभी मेहमानों का पारंपरिक दास्तारबंदी के जरिए सम्मान किया।
प्रतिनिधिमंडल का स्वागत
निजाम गेट पर सूफी परंपरा के अनुसार, प्रतिनिधिमंडल का स्वागत हाजी सैयद सलमान चिश्ती, सैयद अफशां चिश्ती, सैयद रियाजुद्दीन चिश्ती, सैयद मेहराज चिश्ती, सैयद फरीदुल हक, सैयद अमन चिश्ती, सैयद अली हैदर चिश्ती और सैयद जावेद चिश्ती ने किया। अजमेर शरीफ अंजुमन सैय्यदज़ादगान के प्रतिनिधि सैयद हसन हाशमी और सैयद असलम हुसैन ने भी उनका सम्मानपूर्वक स्वागत किया।
प्रतिष्ठित प्रतिनिधि: महर्षि भृगु पीठाधीश्वर गुरुजी गोस्वामी सुशील महाराज, आचार्य विवेक मुनि, फादर सेबेस्टियन, आचार्य येशी फुंतसोक, वीर सिंह हितकारी, गुरसिमरन सिंह मंध, ध्यानाचार्य डॉ. अजय जैन, शाहीन कासमी, मरजबान नरिमन ज़ैवाला, मनिंदर जैन ,ध्रुव शर्मा
प्रतिनिधिमंडल के सभी आध्यात्मिक नेताओं ने अजमेर शरीफ दरगाह की प्रशंसा करते हुए इसे आध्यात्मिक एकता और श्रद्धा का प्रतीक बताया।
महर्षि भृगु पीठाधीश्वर गुरुजी गोस्वामी सुशील महाराज ने कहा, “अजमेर शरीफ दरगाह सभी धर्मों के लिए आस्था और आशा का केंद्र है। यह भारत की धर्मनिरपेक्ष और आध्यात्मिक विरासत का प्रतीक है।
फादर सेबेस्टियन ने कहा, हम अपने देश की शांति और समृद्धि के लिए प्रार्थना करते हैं और पूरी दुनिया में प्रेम और करुणा का संदेश फैलाना चाहते हैं।
संगीतमय श्रद्धांजलि
प्रतिनिधिमंडल ने अरकत दालान में आयोजित सूफी कव्वाली का भी आनंद लिया। कव्वाली ने प्रेम, शांति और ईश्वर से जुड़ाव का संदेश फैलाया।
भारतीय सर्वधर्म संसद जैसे मंच, विविध समुदायों के बीच आपसी सम्मान को बढ़ावा देने के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण हैं।
उन्होंने एक स्वर में कहा, “अजमेर शरीफ दरगाह यह सिखाती है कि प्रेम और आस्था मानवता को एकजुट करने की सबसे शक्तिशाली ताकतें हैं। हम एक ऐसे विश्व की कामना करते हैं, जहां शांति का परचम लहराए और भारत की आवाज पूरी दुनिया में गूंजे।
