ललित शर्मा, indireporter.com
खातीपुरा सड़क चौड़ाईकरण का मुद्दा: न्याय या अन्याय?
क्या वास्तव में हाई कोर्ट ने खातीपुरा रोड को 160 फीट चौड़ा करने और तोड़फोड़ करने का आदेश दिया है?
तथ्यात्मक स्थिति:
जेडीए ने 4 अप्रैल 2025 को एक प्रेस नोट जारी कर 21 नवंबर 2024 के हाई कोर्ट आदेश के आधार पर कार्रवाई की बात कही थी।
जबकि, उसी आदेश को हाई कोर्ट ने 29 नवंबर 2024 को निरस्त कर दिया था, और उस निरस्तीकरण आदेश के खिलाफ कोई अपील भी नहीं की गई।
जयपुर विकास प्राधिकरण 21 नवंबर के पुराने आदेश का हवाला देकर कार्रवाई कर रही है, जो गुमराह करने जैसा है।
27 नवंबर को लाल निशान से और बाद में पीले निशान से सड़क सीमाएं चिन्हित की गईं।
दोनों निशानों में कई जगह 15-20 फीट का अंतर देखा गया, जो यह दर्शाता है कि मध्य बिंदु निर्धारण में भारी गड़बड़ी है।
खातीपुरा गांव स्वतंत्रता से पहले का बसा हुआ है,1950-60 के बीच पंचायत द्वारा जारी पट्टे, 1976-1980 के सहकारी समिति द्वारा आवंटन पत्र – ये सभी मास्टर प्लान या जेडीए के अस्तित्व में आने से पहले के हैं।
इन जमीनों का न तो अधिग्रहण हुआ है और न ही स्वामित्व का कोई वैध ट्रांसफर जेडीए के नाम है।
जेडीए द्वारा 28/11/2024 को जारी नोटिस का अब तक कोई निर्णायक उत्तर नहीं दिया गया।
दर्जनों कानूनी नोटिस दिसंबर 2024 में दिए गए जिनका कोई जवाब जेडीए ने नहीं दिया।
लोग किराए की दुकानों से गुजर-बसर कर रहे हैं, और पीछे छोटे-से मकानों में रहते हैं।
मुआवजा दिए बिना मकानों को गिराना अमानवीय और अन्यायपूर्ण है।
यदि ट्रैफिक दबाव वाकई समस्या है तो जेडीए ने पहले मास्टर प्लान की सड़क (क्वींस रोड के पास) को विलोपित क्यों किया था?
जेडीए स्पष्ट करे कि वह किस आदेश के तहत कार्रवाई कर रही है?
गलत मापन प्रक्रिया की उच्च स्तरीय जांच हो।
सभी वैध दस्तावेजों की समीक्षा कर न्यायसंगत निर्णय लिया जाए।
पीड़ितों को उचित मुआवजा और पुनर्वास की योजना दी जाए।
बिना उत्तर दिए नोटिस का पालन कर तोड़फोड़ करना रोका जाए।
