राजेश कुमावत,indireporter.com
कोटा – बूंदी में सड़क दुर्घटना शून्य करने की दिशा में बड़ा क
सड़क दुर्घटनाओं में युवाओं की मृत्यु चिंताजनक – लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला
सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सरकार के साथ ही सामाजिक संस्थाओं, विशेषज्ञ संगठनों और आम नागरिकों को मिलकर कार्य करना होगा – लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरल
कोटा-बूंदी के सांसद ओम बिरला ने आज संसद भवन स्थित कार्यालय में अपने संसदीय क्षेत्र में सड़क सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए एक महत्वपूर्ण बैठक की। सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में कार्यरत संस्था ‘सेव लाइफ फाउंडेशन’ के प्रतिनिधियों के साथ हुई इस बैठक का उद्देश्य कोटा-बूंदी संसदीय क्षेत्र में “जीरो फेटेलिटी डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम” को प्रभावी ढंग से लागू कर सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मृत्यु को न्यूनतम स्तर तक लाना तथा दीर्घकालिक रूप से शून्य मृत्यु दर (जीरो फेटेलिटी) सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य करना है।
बैठक के दौरान ओम बिरला ने सड़क दुर्घटनाओं में हो रही मौतों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सड़क हादसों में सबसे अधिक जानें युवाओं की जाती हैं, जो न केवल परिवारों के लिए अपूरणीय क्षति है बल्कि राष्ट्र की उत्पादक शक्ति का भी नुकसान है। उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल प्रशासनिक विषय नहीं बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी का विषय है और इसे जन आंदोलन का स्वरूप देने की आवश्यकता है।
बिरला ने कहा कि हमारा लक्ष्य केवल सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाना नहीं, बल्कि कोटा-बूंदी संसदीय क्षेत्र को एक आदर्श “जीरो फेटेलिटी मॉडल” के रूप में विकसित करना है। उन्होंने कहा कि यदि समन्वित प्रयास किए जाएं तो आने वाले वर्षों में सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली मौतों में 70 प्रतिशत तक कमी लाई जा सकती है और अंततः इसे शून्य के करीब पहुंचाया जा सकता है।
बैठक में ‘सेव लाइफ फाउंडेशन’ द्वारा प्रस्तुत विस्तृत अध्ययन और आंकड़ों पर चर्चा की गई। फाउंडेशन ने बताया कि कोटा-बूंदी क्षेत्र में प्रतिवर्ष औसतन 400 से अधिक लोगों की मृत्यु सड़क दुर्घटनाओं के कारण होती है। अध्ययन में ऐसे 21 अति गंभीर सड़क कॉरिडोर (Critical Corridors) चिन्हित किए गए हैं, जहां लगभग 50 प्रतिशत सड़क दुर्घटना जनित मौतें होती हैं।
इसके अतिरिक्त, 19 ऐसे स्थानों की पहचान की गई है जहां बार-बार ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन के कारण लगभग 25 प्रतिशत मौतें होती हैं। वहीं 12 अत्यंत संवेदनशील पैदल यात्री दुर्घटना स्थलों की पहचान की गई है, जहां लगभग 20 प्रतिशत दुर्घटना जनित मौतें दर्ज की गई हैं।
