शिव वर्मा, indireporter.com
बच्छ बारस (वत्स द्वादशी)
शुक्रवार, 30 अगस्त 2024 को वत्स द्वादशी (बच्छ बारस) का पर्व
राजस्थान सहित उत्तर-भारत के अधिकांश भागों में बच्छ बारस के दिन माताएं बछड़े सहित गाय का पूजन करती हैं, और अपने पुत्र की दीर्घायु एवं कुशल मंगल हेतु व्रत रखती हैं।
ऐसी मान्यता है कि बच्छ बारस के दिन गाय के दूध पर उसके बछड़े का अधिकार होता है, अतः गाय के दूध का सेवन नहीं किया जाता.
चाकू से काटी सब्जियां, फल भी नहीं खायी जाती, गेहूं के आटे का उपयोग नहीं किया जाता अतः चावल, मक्की, बाजरे की रोटी खायी जाती है, मूंग-चांवल, अनारदाना की कढ़ी, चना-चांवल मुख्य रूप से खाए जाते हैं।
प्रातः सभी महिलाऐं अपने नित्य कर्म स्नान के बाद पुत्रों के साथ सुन्दर लाल-पीले वस्त्र धारण कर अपने-अपने मोहल्ले में किसी गाय ने हाल ही में बछड़े को जन्म दिया हो उस घर या गौशाला जाकर गाय और बछड़े की विधिवत पूजा करती है, और अपने पुत्र की दीर्घायु एवं उज्जवल भविष्य की कामना करती है।
गाय के गोबर में चांदी के सिक्के से पूजा की जाती है.
गाय और बछड़े को अंकुरित मूंग-चने, बाजरे के लड्डू और नारियल भोग के रूप में खिलाये जाते हैं और अपने परिवार जनों को नारियल का प्रसाद दिया जाता है।
