दिलीप भट्ट, indireporter.com
लोक नाट्य तमाशा “गोपीचंद भर्तृहरि” कि बही संगीत की अद्भुत रचनाएं।
जयपुर। चैत्र की अमावस्या के दिन आमेर में स्थित अंबिकेश्वर महादेव मंदिर प्रांगण में दोपहर 1 बजे आरम्भ हुआ तमाशा गोपीचंद भर्तृहरि का प्रदर्शन जिससे संगीत की रसधारा बहते हुए आमेर में पुरानी लोक नाट्य परम्परा पुनः जीवित हुई तमाशा प्रबंधकारिणी समिति और परम्परा नाट्य समिति द्वारा तमाशा की शुरुआत लहरिया और गणेश वंदना से हुई “श्री गण नाथ कृपाला बांधो श्री गण नाथ कृपाला” और उसके बाद “सुमरू शारद मत गणेश मोपे कृपा करो हमेश” राग पहाड़ी भोपाली से तमाशा गोपीचंद भर्तृहरि कि सुंदर प्रस्तुति से पूरे आमेर में तमाशा गूंजता रहा अवसर था आमेर में स्थित अंबिकेश्वर महादेव मंदिर प्रांगण में बंशीधर जी भट्ट रचित तमाशा गोपीचंद भर्तृहरि जिसका निर्देशन तमाशा साधक दिलीप भट्ट ने किया राग रंगीनियों से पूर्ण केंद्रित था। तमाशा जिन रागों का समावेश था जिनमें बिहाग, मालकौंस, भैरव, भैरवी, सिंधकाफी, कैदार, कॉलिंगडा, वृंदावनी सारंग तमाशे में जिन कलाकारों ने भाग लिया राजा गोपीचंद (दिलीप भट्ट), गुरु जालंधर (सचिन भट्ट), माता मैनावती (ईश्वर दत्त माथुर), रानी पाटम(हर्ष भट्ट), चंद्रावल बहन(जीवितेश शर्मा) कोरस में गोपेश भट्ट, हर्ष भट्ट, तबले पर पारंपरिक कलाकार शैलेन्द्र शर्मा, हारमोनियम पर शेर खान व मथुरेश भट्ट, सारंगी पर मनोहर टांक व फिरदौस थे तमाशे की खासियत गोपी जी भट्ट द्वारा गायी जानेवाली रचनाओं को दिलीप भट्ट ने बड़े रोचक और तन्मयता से पेश की जिसमें गणगौर, “रंगीला शंभो गोराना ले पधारों प्यारा पावना”, “काले भुजंग सिरधरे इक जोगी आया है” और “चरण कमल बांधो हरि राई” सुनाकर दर्शकों में एक आनंद बसाया उसके बाद हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ किया गया आयोजन में पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र उदयपुर, जयपुर विरासत फाउंडेशन, जयपुर विरासत फाउंडेशन और तमाशा प्रबंधकारिणी समिति द्वारा इस भव्य “गोपीचंद भर्तृहरि” तमाशे का आयोजन किया गया था यह तमाशा परम्परा भट्ट परिवार की 250 वर्ष पूर्व की लोक नाट्य परम्परा है जो भट्ट परिवार में गोपी जी भट्ट के बाद आज भी उसी रूप में जीवित हे और जीवित रहेगी।
