Shiv Verma, indireporter.com
मेहरानगढ़ म्यूजियम ट्रस्ट, मेहरानगढ़ दुर्ग को भारत का पहला यूनेस्को ग्लोबल जियोपार्क बनाने की दिशा में जन-जागरूकता अभियान का हुआ आग़ाज़
महाराजा गज सिंह के मुख्य संरक्षण व मार्गदर्शन में हुआ आयोजन 300 से अधिक प्रतिभागियों ने जिओ हेरिटेज वॉक में भागीदारी निभाई
मेहरानगढ़ दुर्ग में छह प्रमुख जिओ साइट्स एवं हेरिटेज साइटस की हेरिटेज वॉक में दी गई जानकारी पांचवा अतंरराष्ट्रीय भू विविधता दिवस का हुआ आयोजन
जोधपुर, 6 अक्टूबर। अंतरराष्ट्रीय भू-विविधता दिवस के अवसर पर मेहरानगढ़ दुर्ग में आयोजित “मेहरानगढ़ जियोहेरिटेज वॉक” में 300 से अधिक प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य मेहरानगढ़ क्षेत्र की समृद्ध भू-विरासत, भू-विविधता, जल विरासत एवं सांस्कृतिक विरासत के प्रति आमजन में जागरूकता पैदा करना तथा जियो-टूरिज्म को बढ़ावा देना था। जियोहेरिटेज वॉक आयोजन समिति के संयोजक डॉ. शिव सिंह राठौड़ ने बताया कि कार्यक्रम महाराजा गज सिंह जी के मुख्य संरक्षण में मार्गदर्शन में आयोजित हुआ ।कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः 7:00 बजे मेहरानगढ़ म्यूजियम ट्रस्ट के प्रशासनिक अधिकारी कर्नल अजय सिंह शेखावत के स्वागत उद्बोधन से हुई। इसके पश्चात डॉ. शिव सिंह राठौड़ ने कार्यक्रम की रूपरेखा एवं उद्देश्य की जानकारी देते हुए बताया कि मेहरानगढ़ क्षेत्र में यूनेस्को ग्लोबल जियोपार्क की दृष्टि से महत्वपूर्ण छह जियोसाइट्स एवं हेरिटेज साइट्स को चिन्हित कर उनके वैज्ञानिक, ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व को प्रतिभागियों तक पहुंचाया गया।*छह महत्वपूर्ण स्थलों की वैज्ञानिक एवं विरासत जानकारी* पहले दो जियोसाइट्स वेल्डेड टफ तथा दुर्ग में लिफ्ट के समीप स्थित नॉन-कॉन्फॉर्मिटी के बारे में डॉ. सुरेश माथुर ने विस्तृत वैज्ञानिक जानकारी प्रदान की। उन्होंने इन भू-वैज्ञानिक संरचनाओं के निर्माण, विशेषताओं तथा मेहरानगढ़ की भू-विरासत में उनके महत्व को समझाया। मेहरानगढ़ म्यूजियम ट्रस्ट स्थित महाराजा मानसिंह पुस्तक प्रकाश शोध केंद्र के सहायक निदेशक डॉ. महेंद्र सिंह तंवर ने चोकेलाव महल, झरना खान, चोकेलाव बाग सहित अन्य संबंधित हेरिटेज साइट्स के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने इन स्थलों के ऐतिहासिक, स्थापत्य, सांस्कृतिक एवं पर्यावरणीय महत्व को भू-विरासत से जोड़ते हुए प्रतिभागियों को जानकारी प्रदान की । छठेमहत्वपूर्णहाइड्रोजियो साइट रानीसर के बारे में डॉ. शिव सिंह राठौड़ ने विस्तृत जानकारी देते हुए मेहरानगढ़ क्षेत्र की पारंपरिक जल संरचनाओं, जल संरक्षण एवं स्थानीय भूगर्भीय परिस्थितियों के बीच संबंध को समझाया। वॉक के दौरान डॉ अभिनव सहित अनेक प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा किए और इसे भू-विरासत को समझने तथा मेहरानगढ़ को नए दृष्टिकोण से देखने का अविस्मरणीय अनुभव बताया।*नागरिकों,विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं विशेषज्ञों ने लिया भाग* कार्यक्रम में कृषि एवं एमबीएम विश्वविद्यालय के कुलगुरू प्रो ( डॉ )वीरेन्द्र सिंह जैतावत, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) के पूर्व अधिकारी भंवरा राम, पूर्व अतिरिक्त मुख्य नगर नियोजक पी आर बेनीवाल, राजेंद्र सिंह लीलिया,मोहन सिंह जोधा, शक्ति सिंह शेखावत, डॉ शक्ति सिंह खाखडकी ,उम्मेद सिंह डाबड़ी, प्रीतम सिंह राठौड़,नारायण सिंह मुगदड़ा ,सुनील माथुर,लादू सिंह उदावत ,सुरेंद्र माथुर,केसर सिंह नरूका,गोवर्धन सिंह,महाराजा सरदार सिंह मेमोरियल छात्रावास एवं खेल केंद्र के कल्याण सिंह रॉयल बालिका छात्रावास की वार्डन विजयलक्ष्मी व बालिकाएं, एमबीएम के विद्यार्थी, शोधार्थी, जियोसाइंस से जुड़े विशेषज्ञ, टूरिस्ट गाइड तथा शहर के गणमान्य नागरिकों सहित बड़ी संख्या में प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।चोकेलाव बाग में अल्पाहार के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। आयोजन समिति ने कार्यक्रम के सफल आयोजन में सहयोग के लिए महाराजा गज सिंह , मेहरानगढ़ म्यूजियम ट्रस्ट एवं इंटेक का आभार व्यक्त किया। समिति ने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रमों के माध्यम से मेहरानगढ़ की भू-विरासत और भू-विविधता को आमजन, विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं पर्यटकों से जोड़ने के प्रयास निरंतर जारी रहेंगे।( राजेन्द्र सिंह लीलियाँ ) पीआरओउम्मेद भवन पैलेस
