विनय अग्रवाल,indiretorter.com
घोषवादकों ने निकाला पथ संचलन
जयपुर,
संगीत न केवल चर, बल्कि अचर जगत की संवेदनाओं को भी प्रभावित करता है। भारतीय संगीत परंपरा में खुशी, उत्साह तथा साधना के हर अवसर पर संगीत का विशिष्ट प्रयोग होता आया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में संगीत यानी घोष विभाग ने ऐसी उत्कृष्ट स्वदेशी रचनाओं का निर्माण किया है, जिनका प्रयोग आज भारतीय सेना द्वारा भी अत्यंत गर्व के साथ किया जा रहा है।
यह मुख्य वक्ता के रूप उपस्थितआदरणीय अनिल जी ओक (अखिल भारतीय सह व्यवस्था प्रमुख) ने शुक्रवार को ऋषि गालव भाग द्वारा श्री कृष्ण जन्माष्टमी के उपलक्ष्य पर प्रांत घोष दिवस के अवसर पर आयोजित ‘नाद गोविंदम् 3.0’ कार्यक्रम में संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि घोष की ओजस्वी स्वरलहरियां स्वयंसेवकों में अनुशासन, एकाग्रता और राष्ट्रभक्ति का संचार करती हैं। संघ के ‘राष्ट्र समर्पण के 100 वर्ष’ के पावन अवसर पर यह आयोजन अत्यंत प्रासंगिक एवं प्रेरणादायी है। कार्यक्रम के अंतर्गत तोपखाना संघस्थान से सायं 5:30 बजे भव्य घोष पथ संचलन प्रारंभ हुआ। संचलन पाँचबत्ती, अजमेरी द्वार होते हुए रामनिवास बाग स्थित अल्बर्ट हॉल संग्रहालय पहुंचा। घोष वाद्य यंत्रों की अनुशासित स्वरलहरियों के साथ सैकड़ों स्वयंसेवकों ने कदम से कदम मिलाकर पथ संचलन किया। इसके उपरांत अल्बर्ट हॉल परिसर में सायं 6:00 बजे विशाल स्थिर वादन कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि प्रसिद्ध गायक, संगीकार एवं मोहन वीणा वादक पं. आलोक जी भट्ट उपस्थित रहे। उन्होंने कहा
इस अवसर पर संघ के वरिष्ठ अधिकारी एवं शहर के प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित रहे।
