राजेश कुमावत, indireporter.com
सरकार ने विधानसभा में माना की राज्य में भिक्षावृत्ति के 20 मामले हैं
राज्य सरकार भिक्षावृत्ति पर अंकुश लगाने के लिए प्रयासरत: अविनाश गहलोत, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री
जयपुर, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री अविनाश गहलोत ने विधानसभा में कहा कि भिक्षावृत्ति एक गंभीर समस्या है राज्य सरकार भिक्षावृत्ति पर अंकुश लगाने के लिए प्रयासरत है। भीक्षावृत्ति के लिए विभिन्न गैर सरकारी संगठनों और संस्थाओं की सहायता से जनजागरण अभियान चलाया जायेगा, जनप्रतिनिधियों से प्राप्त सुझावों को भी शामिल किया जायेगा।
अविनाश गहलोत ने बताया कि राज्य में विभिन्न स्थानों पर भिक्षावृत्ति के प्रकरण पुलिस के संज्ञान में आने पर पुलिस द्वारा प्रदेश के विभिन्न थानों में कुल 20 प्रकरण दर्ज किए गए जिनमें से 3 प्रकरण जयपुर शहर मे दर्ज किये गये एवं इनमें से 19 में चालान पेश किया गया। उन्होंने इन प्रकरणों का विवरण सदन के पटल पर रखा। उन्होंने बताया कि प्रदेश में भिक्षावृत्ति पर नियंत्रण एवं निगरानी हेतु पुलिस विभाग द्वारा विशेष अभियान उमंग चलाया जा रहा है। पुलिस द्वारा प्रदेश मे भिक्षावृत्ति पर नियमित निगरानी एवं गश्त जारी
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री ने विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान सदस्यों द्वारा भीक्षावृत्ति के संबंध में पूछे गए प्रश्नों का जवाब दे रहे थे। राजस्थान भिखारियों या निर्धन व्यक्तियो का पुनर्वास अधिनियम, 2012 में भिक्षावृत्ति पर कोई दंडात्मक प्रावधान नहीं है। किशोर न्याय अधिनियम के तहत भिक्षावृत्ति का सिंडिकेट चलाने पर 5 से 10 साल तक की सजा का प्रावधान है।
सार्वजनिक स्थानों, धार्मिक स्थानों, स्टेशनों और चौराहों आदि पर भिक्षावृत्ति एक गंभीर समस्या है। गत 2 वर्षों में भिक्षावृत्ति में लिप्त बालकों की जिला स्तर पर रोकथाम एवं पुनर्वास के लिए जयपुर में 100 बालकों की क्षमता के 3 पुनर्वास केंद्र संचालित है तथा इन बालकों के रेस्क्यू का काम भी सरकार द्वारा किया जाता है।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री ने बताया कि भिक्षावृत्ति में लिप्त भिखारियों और किन्नरों के पुनर्वास के लिए केंद्र सरकार द्वारा संचालित ऑपरेशन स्माइल में सिटी पैलेस जयपुर, उदयपुर और जैसलमेर क्षेत्र को चिन्हित किया गया है।
