राजेश कुमावत indireporter.com
गणेश चतुर्थी महापर्व शुरू, शनि पुष्य नक्षत्र के अवसर पर सभी प्रतिष्ठित गणेश मंदिरों में भगवान गणेश के महाभिषेक के साथ ही गणेश चतुर्थी महापर्व शुरू ।
प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश का जन्मोत्सव “गणेश चतुर्थी” महापर्व शनिवार को “पुष्य नक्षत्र” पर भगवान श्री गणेश जी का पंचामृत महाभिषेक के साथ हुआ, पुष्य नक्षत्र के अवसर पर मोती डूंगरी स्थित भगवान श्री गणेश जी की विग्रह को 251 किलो दूध, 25 किलो, बूरा 50 किलो, दही 11 किलो, शहद और 11 किलो गाय का देसी घी से भगवान गणेश जी का महाभिषेक मंदिर महंत केलाश शर्मा ने सहयोगियों के साथ किया।
पुष्य नक्षत्र के अवसर पर महा अभिषेक से पूर्व लगभग 500 महिलाएं सर पर कलश धारण कर मंगलाचरण गीत गाती हुई शोभायात्रा यात्रा मोती डूंगरी मंदिर पहुंची,
शोभा यात्रा में आगे हाथी घोड़े ऊंट का लवाजमा चल रहा था, और बैण्ड वादक मधुर भजनों के साथ शोभा यात्रा मोती डूंगरी गणेश मंदिर पहुंचकर समापन हुई।
इस अवसर पर गणेश मंदिर में भगवान गणेश का महा अभिषेक देखने वालों का ताता लगा रहा।
श्री नहर के गणेश जी महाराज का परंपरागत दूर्वा मार्जन से शनि पुष्य पर हुआ पंचामृत अभिषेक
ब्रह्मपुरी माऊण्ट रोड़ पर स्थित अतिप्राचीन दाहिनीं सूँड़ दक्षिणमुखी श्री नहर के गणेशजी महाराज का शनि पुष्य पर परंपरागत दूर्वा मार्जन से पंचामृत अभिषेक किया गया।
मंदिर युवाचार्य पं. मानव शर्मा ने बताया कि इस अवसर पर मंदिर महंत पं. जय शर्मा के सान्निध्य में प्रातः 8 बजे से श्री गणपति अथर्वशीर्ष के पाठ किये गये तत्पश्चात प्रातः 9. 15 से गणपति का दूर्वा मार्जन से पंचामृत अभिषेक व पूजा अर्चना की गई , दोपहर 2 से 4 के मध्य गणपति प्रभु को नवीन पौषाक धारण करवाकर वैदिक मंत्रों द्वारा 21 मोदकों भोग लगाकर ऋवेदोक्त गणपति मात्रिका का पाठ कर शयन करवाया गया, सायंकालीन महाआरती 251 दीपकों से की गई एवं मंदिर में आने वाले भक्तजनों को अभिमंत्रित सुख – समृद्धि कारक रक्षासूत्र वितरित किए गये ।
