शिव वर्मा. जोधपुर indireporter.com
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर विशेष
जोधपुर, प्रकृति प्रेमी डॉक्टर संपत सिंह गहलोत घर-घर वृक्षारोपण के लिए दस्तक देते हैं। आपको शहर के किसी भी मोड़ पर मिल जाएंगे। उनकी कार में सांसें लौटाने का फर्स्टएड बॉक्स हमेशा तैयार रहता है। जी हां, हम बात पौधों की ही कर रहे हैं। कोरोना के बाद शहर ही नहीं देश में ऑक्सीजन की कमी को शिद्दत से महसूस किया गया। अब डॉ. गहलोत ने मिशन बना लिया है कि शहर को हरा-भरा करके रहेंगे। वे अकेले ही अपने मिशन में जुटे हैं। मंडोर सैटेलाहट अस्पताल से रिटायर होने के बाद उन्होंने पौधे लगाने के अभियान को अपनाया। अब वे दिन भर भ्रमण करते हैं और जहां भी उपयुक्त जगह देखते हैं पौधा लगा देते हैं। जागरूक लोगों को वृक्षारोपण देखभाल की जिम्मेदारी सौंप देते हैं। वे जहां भी जाते हैं अपनी कार से पौधे निकाल कर लोगों को सौंप देते हैं और कई जगह खुद अपने हाथों से पौधे लगाते हैँ और यह सिलसिला वर्षों से चल रहा है।
डॉ. गहलोत का कहना है कि छोटे पौधे लगाने के बाद कई जगहों पर पशु इन्हें खा जाते हैं। इनको देखते हुए अब एडल्ट प्लांटेशन का क्रेज बढ़ रहा है। वे 8 फीट से 15 फीट तक हाइट के पौधों को रोप कर इनके साथ 12 फीट ऊंचे बांस से पौधों को बांधते हैं। इसके बाद पौधों की देखरेख की जिम्मेदारी किसी जागरूक व्यक्ति को सौंप देते हैं। खुद भी अपने लगाए पौधे की सार-संभाल करते हैं। अस्पताल से रिटायर होने के बाद पूरी तरह डॉ. गहलोत पर्यावरण संरक्षण में जुटे गए। उनका एक ही कार्य है अधिक से अधिक पौधे लगाकर शहर को हरा-भरा करना और ऑक्सीजन का लेवल प्रकृति में बढ़ाना।
डॉ. गहलोत ने अब तक भदवासिया, मटकी चौराहा, धान मंडी , निम्बा निंबड़ी, मंडोर, मंडोर सैटेलाइट हॉस्पिटल, अमृतलाल गहलोत स्टेडियम, पावटा सहित शहर के कई कोनों में हजारों पौधे लगाए हैं। अपने दम पर शहर को हरा भरा करने का बीड़ा उठाया है। पीपल, बरगद, नीम, बिल्व पत्र, खारी बादाम, गुल मोहर, शीशम, आम, आंवला, अमरूद, केला, जामुन ,कीनू, सहित कई प्रजातियों के वृक्षारोपण करते हैं।
