राजेश कुमावत , indireporter.com
डोल का बाढ़ में वन बचाओ आंदोलन को मिला बड़ा समर्थन, सचिन पायलट ने कहा- “पेड़ों पर बुलडोजर नहीं चले, संवाद से निकले समाधान”
जयपुर, डोल का बाढ़ क्षेत्र में प्रस्तावित औद्योगिक परियोजना के खिलाफ चल रहे वन बचाओ आंदोलन ने अब नई रफ्तार पकड़ ली है। हजारों पेड़ों की कटाई और स्थानीय जैवविविधता को खतरे में डालने वाले इस प्रोजेक्ट के विरोध में पर्यावरण प्रेमियों, युवाओं और ग्रामीणों के साथ अब राजनीतिक समर्थन भी बढ़ता जा रहा है। इसी कड़ी में आज कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने ग्राउंड जीरो पहुंचकर आंदोलन को अपना समर्थन दिया।
सचिन पायलट ने मौके पर पहुंचकर डोल का बाढ़ वन क्षेत्र का निरीक्षण किया और आंदोलनरत युवाओं, पर्यावरण कार्यकर्ताओं, ग्रामीणों से विस्तार से बातचीत की। उन्होंने पशु-पक्षियों, वनस्पतियों और क्षेत्र की पारिस्थितिकी पर पड़ने वाले प्रभाव की जानकारी ली।
पायलट ने साफ तौर पर कहा, “हमारा देश लोकतांत्रिक है। जो युवा शिक्षित हैं, जागरूक हैं, पर्यावरण की चिंता करते हैं—उनकी आवाज सुनी जानी चाहिए। विकास जरूरी है, लेकिन पेड़-पौधे और पर्यावरण भी उतने ही ज़रूरी हैं।”
सचिन पायलट ने कहा कि सरकार को चाहिए कि वह आंदोलन कर रहे युवाओं और विशेषज्ञों से संवाद करे, उनकी चिंताओं को सुने और किसी निष्कर्ष पर पहुंचे। उन्होंने कहा, “जनता विकास के खिलाफ नहीं है, लेकिन जब बात पर्यावरण और फेफड़ों जैसे क्षेत्रों की हो, तो सरकार को संवेदनशील रवैया अपनाना चाहिए।”
उन्होंने कहा कि पेड़ों पर बुलडोजर चलाना आसान है, लेकिन जंगल उगाने में पीढ़ियां लगती हैं।
सचिन पायलट ने सरकार से इस पूरे विवाद पर हाई पावर कमेटी गठित करने की मांग की है, जो डोल का बाढ़ क्षेत्र की पारिस्थितिकी, जैवविविधता और प्रस्तावित औद्योगिक परियोजना के प्रभावों की निष्पक्ष जांच करे। उन्होंने कहा कि यह कमेटी सीधे अदालत या जनसुनवाई में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करे।
गौरतलब है कि रीको (RIICO) की ओर से डोल का बाढ़ क्षेत्र की करीब 100 एकड़ भूमि पर एक बड़ा पीएम यूनिट मॉल और औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने का प्रस्ताव है। इस जमीन पर हजारों पेड़ और महत्वपूर्ण इकोसिस्टम मौजूद हैं। पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि इस क्षेत्र को विकसित करने की बजाय ऐसे क्षेत्रों की रक्षा करनी चाहिए जो शहर को शुद्ध हवा और जीवन देने का काम करते हैं।
इससे पहले राजस्थान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली भी आंदोलनकारियों के साथ अपनी एकजुटता जता चुके हैं। अब सचिन पायलट के समर्थन से इस आंदोलन को नई मजबूती मिली है
सचिन पायलट ने इस बात पर भी सवाल उठाया कि “5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस पर जगह-जगह पौधारोपण किए गए, लेकिन वहीं राजधानी के अंदर ही पर्यावरण के प्रमुख क्षेत्र को उजाड़ने की तैयारी चल रही है। क्या यही सरकार की पर्यावरण नीति है।
दीपक बालियान, रेखा शर्मा, धीरेश जैन, विजेंद्र शेखावत, कोमल श्रीवास्तव, कविता श्रीवास्तव, विशाल सैनी, महिमा चौधरी, शशि मीना, चंद्रवीर बेनीवाल, शौर्य गोयल, आशुतोष रांका
