राजेश कुमावत, indireporter.com
राजस्थान के आईपीएस को मिली तवज्जो,
पुलिस विभाग में राजस्थान के काबिल अफसरों की उपेक्षा को लेकर आक्रोश है ।
सरकार प्रदेश से संबंध रखने वाले अधिकांशतः अफसरों को महत्वपूर्ण पोस्टिंग दी है ।
यूपी के संजय अग्रवाल को नजरअंदाज करतें हुए करोली के गोविंद गुप्ता को एसीबी का डीजी, झुंझुनू के हवासिंह घुमरिया को एडीजी क्राइम, अजमेर के विशाल बंसल को एडीजी (एसओजी), जोधपुर के अशोक राठौड़ को डीजी (जेल), अलवर के सत्येंद्र कुमार और टोंक के डॉ रामेश्वर सिंह को एसीबी, जयपुर की लता मोहन को सिविल राइट्स तथा झुंझुनू के प्रह्लाद कृष्णिया को अपराध शाखा में पोस्टिंग दी गई है । उम्मीद है कि भविष्य में होने वाले तबादलो में भी राजस्थानियों को अहमियत दी जाएगी ।
राजस्थान में जो अधिकारी जनता की उम्मीद बनते हैं, वही अचानक तबादले की भेंट चढ़ जाते हैं।
आईजी विकास कुमार ने नशे के कारोबारियों पर ऐसा शिकंजा कसा कि पूरे इलाके में हलचल मच गई। ड्रग माफिया की कमर टूटने लगी, लगातार कार्रवाई हुई, लोगों को लगा अब हालात बदलेंगे। सरकार की सराहना भी हुई।
आई एडीजी दिनेश एमएन, ने अपराध और गैंगवार पर एक्शन ने अपराधियों में खौफ और आमजन में भरोसा पैदा हुआ, ओर पुलिस का मनोबल ऊंचा हुआ, सरकार की छवि मजबूत दिखी।
एडीजी वी.के. सिंह ने नकल माफिया के खिलाफ मोर्चा खोला, कई सालों से जमा गंदगी सामने आ गई। फर्जी परीक्षाओं का जाल टूटा, छोटे-बड़े अफसरों से लेकर गिरोहों तक की नींव हिली। जनता ने राहत की सांस ली, सरकार की वाहवाही हुई।
आईजी राहुल प्रकाश, ने भरतपुर से लेकर जयपुर तक अपराधियों और साइबर ठगों पर ताबड़तोड़ कार्रवाई, ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार, सड़कों पर अनुशासन का असर दिखा। जनता खुश थी
राजस्थान में “अच्छा काम करना” या अफसरों की लोकप्रियता किसी के लिए “समस्या” बन गई है?
