राजेश कुमावत ,indireporter,com
कुमावत समाज के 60 साल की विरासत को समेटे ‘शिल्पकला विशेषांक’ का विमोचन
राजस्थान सरकार के मंत्री जोराराम कुमावत बोले- यह केवल प्रकाशन नहीं, समाज के हुनर और गौरवशाली परंपरा का दस्तावेज
जयपुर। कुमावत समाज की समृद्ध शिल्प, स्थापत्य और सांस्कृतिक विरासत को दस्तावेज के रूप में सहेजते हुए कुमावत क्षत्रिय पत्र ट्रस्ट की ओर से प्रकाशित ‘शिल्पकला विशेषांक’ का विमोचन पशुपालन एवं डेयरी, गौपालन एवं देवस्थान विभाग के मंत्री जोराराम कुमावत ने किया। शिल्पकला विशेषांक में समाज के शिल्पकारों, मूर्तिकारों, वास्तुकारों, संगीत, इंजीनियरिंग और विभिन्न तकनीकी एवं रचनात्मक क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली प्रतिभाओं को स्थान दिया गया है।
मंत्री जोराराम कुमावत ने कहा कि ‘शिल्पकला विशेषांक’ केवल एक प्रकाशन नहीं, बल्कि कुमावत समाज के हुनर, मेहनत, कला और सृजनशीलता की गौरवगाथा है। राजस्थान की ऐतिहासिक इमारतों, मंदिरों, हवेलियों और अन्य स्थापत्य धरोहरों में शिल्पकारों की कला और परिश्रम की छाप दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि समाज की इस विरासत को संकलित कर नई पीढ़ी तक पहुंचाना सराहनीय पहल है। इससे युवाओं को अपनी जड़ों से जुड़ने और अपनी प्रतिभा को आगे बढ़ाने की प्रेरणा मिलेगी।
शोधपरक सामग्री विशेषांक की खासियत
विशेषांक में शिल्प एवं स्थापत्य परंपरा से जुड़े व्यक्तित्वों के जीवन-वृत्त, ऐतिहासिक योगदान और उल्लेखनीय कार्यों का शोधपरक संकलन किया गया है। भवन निर्माण, मूर्तिकला, वास्तुकला, इंजीनियरिंग, संगीत सहित विभिन्न क्षेत्रों में समाज के योगदान को भी इसमें प्रमुखता दी गई है। ट्रस्ट अध्यक्ष रामपाल कुमावत (जूनवाल) ने कहा कि कुमावत क्षत्रिय पत्रिका पिछले 60 वर्षों से समाज की आवाज और उपलब्धियों को देशभर तक पहुंचाने का कार्य कर रही है। पत्रिका द्वारा अब तक 13 विशेषांक प्रकाशित किए जा चुके हैंl ‘शिल्पकला विशेषांक’ इसी गौरवशाली यात्रा की महत्वपूर्ण कड़ी है। इसका उद्देश्य अतीत को सहेजने के साथ समाज की विरासत को भविष्य की पीढ़ी तक पहुंचाना है। इस अवसर पर लालचंद राहोरिया, रामधन देवतवाल, रामगोपाल निमीवाल, राकेश सिरोहिया, हरीशचंद्र पारमवाल, जयसिंह गुडीवाल, बृजगोपाल नीमिवाल, आशुतोष कुमावत, अशोक तुनगरिया, लक्ष्मीकांत कुदीवाल, मनोज कुमावत सहित अनेक समाजबंधु मौजूद रहे।
