आयुष शर्मा, indireporter.com
राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कहा- अब से शिक्षा विभाग,पंचायती राज और संस्कृत शिक्षा विभाग में सिर्फ भारत में बने सामान की ही खरीद की जाएगी। तीनों विभागों में विदेश में निर्मित सामान की खरीद पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है
“विदेशी वस्तुओं पर प्रतिबंध का निर्णय बच्चों के संस्कारों और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम – शिक्षा मंत्री मदन दिलावर जी का फैसला तार्किक और युगानुकूल” -अधिवक्ता आयुष शर्मा
कांग्रेस नेता गोविंद सिंह डोटासरा द्वारा शिक्षा मंत्री मदन दिलावर पर लगाए गए आरोप न केवल भ्रामक हैं, बल्कि तकनीक और विदेशी उपभोक्ता वस्तुओं के बीच अंतर न समझ पाने की उनकी मानसिकता को भी दर्शाते हैं।
- मंत्री का निर्णय विदेशी उपभोक्ता वस्तुओं के दिखावे पर रोक लगाने से जुड़ा है, ताकि स्कूलों में जन्मदिन, पार्टियों आदि में महंगे विदेशी गिफ्ट, चॉकलेट्स, फैंसी टॉफियां और अन्य चीजें लाने के चलन को खत्म किया जा सके, जिससे बच्चों में सादगी, भारतीयता और आत्मनिर्भरता का भाव विकसित हो।
- तकनीक और उपकरणों पर रोक का कोई सवाल ही नहीं उठता। कंप्यूटर, डिजिटल बोर्ड, प्रोजेक्टर, प्रिंटर जैसी चीजें बच्चों को आधुनिक शिक्षा देने के लिए जरूरी हैं, और उनका उपयोग पहले की तरह जारी रहेगा।
- शिक्षा मंत्री का यह कदम बच्चों को अपनी संस्कृति से जोड़ने और विदेशी उपभोक्तावाद के अंधानुकरण से बचाने के लिए है। यह निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “वोकल फॉर लोकल” और “आत्मनिर्भर भारत” अभियान के अनुरूप है।
- कांग्रेस और उसके नेताओं को पहले स्वदेशी और विदेशी में फर्क समझना चाहिए, और सस्ती राजनीति के बजाय बच्चों के भविष्य को मजबूत करने वाले इस निर्णय का स्वागत करना चाहिए।
- डोटासरा जैसे नेता, जो हर अच्छे कार्य का मजाक उड़ाकर शिक्षा व्यवस्था को राजनीति का अखाड़ा बनाना चाहते हैं, उनके बेतुके बयानों से भाजपा सरकार के राष्ट्रवादी एजेंडे और संस्कृतिपरक शिक्षा के प्रयासों को कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है।
मैं प्रदेश के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा जी और शिक्षा मंत्री मदन दिलावर का अभिनंदन करता हूँ , जिन्होंने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए यह दूरदर्शी और साहसिक निर्णय लिया है।
✍️अधिवक्ता आयुष शर्मा
