धर्मवीर चौधरी ,indireporter.com
राजस्थान स्टेट रोडवेज एम्पलाईज यूनियन – एटक रोडवेज कामगारों ने प्रदेश स्तरीय विशाल धरना! दिया।
जयपुर , राजस्थान स्टेट रोडवेज एम्पलाईज यूनियन (एटक / AITUC) के बैनर तले रोडवेज के एक हजार से ज्यादा सेवारत एवं सेवानिवृत कामगारों ने गुरुवार को जयपुर में रोडवेज के मुख्यालय पर प्रदेश स्तरीय विशाल धरना दिया।
धरना “रोडवेज बचाओ – रोजगार बचाओ” नारे के साथ रोडवेज संस्थान, सेवारत कामगारों एवं सेवानिवृत कामगारों के व्यापक हितों की ज्वलंत 11 सूत्री मांगों के लिये दिया गया। धरने को सम्बोधित करते हुये यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष एम.एल. यादव ने कहा कि एक समय में रोडवेज में 25 हजार से ज्यादा कामगार एवं 4 हजार 500 से ज्यादा रोडवेज की खुद की बसें होती थी। वसुंधरा राजे की सरकार के समय से निजी बस मालिकों को पनपाने के लिये रोडवेज के प्रति अपनाई गई दुर्लक्षता की नीति अशोक गहलोत की सरकार में चलते हुये वर्तमान भजन लाल शर्मा की सरकार में भी जारी है। इसके दुष्परिणाम स्वरूप इस समय 10 हजार कामगार एवं रोडवेज की खुद की 2 हजार 580 बसें ही रह गई हैं, जिनमें 850 वे बहुत पुरानी बसें भी शामिल हैं, जो नकारा श्रेणी में पहुंच चुकी हैं। राज्य सरकार द्वारा जन सुविधा के लिये रोडवेज की खुद की पर्याप्त बसों के लिये धन राशि उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने के कारण रोडवेज प्रबंधन निजी बस मालिकों की बसों को रोडवेज में अनुबंध पर लेता जा रहा है। यह रोडवेज के वजूद के लिये भारी खतरा है। रोडवेज को बचाने के लिये 15 हजार रिक्त पदों पर नई भर्ती एवं 2 हजार 500 नई बसों की खरीदने की जरूरत है। यादव ने कहा कि कामगारों की भारी कमी के कारण चालकों / परिचालकों से कानूनन प्रतिदिन के 8 घंटे के निर्धारित कार्य के बजाय 12 घंटे से 16 घंटे तक का कार्य लिया जा रहा है, जिसका अतरिक्त वेतन नहीं दिया जाता, समय पर साप्ताहिक विश्राम नहीं दिया जाता एवं अन्य अवकाश समय पर नहीं दिये जाते। रोडवेज प्रबंधन का यह कृत्य केवल चालकों / परिचालकों का मानसिक, शारीरिक, आर्थिक शोषण ही नहीं, बल्कि मोटर परिवहन कामगार अधिनियम, 1961 के प्रावधानों के अंतर्गत आर्थिक जुर्माने या जेल की सजा अथवा इन दौनों से दंडनीय अपराध है। यादव ने कहा कि 30 से 35 साल की सेवा के उपरान्त गत 10 साल की अवधि में बड़ी संख्या में सेवानिवृत हुये चालकों / परिचालकों के अधिश्रम भते, साप्ताहिक अवकाश एवं सवैतनिक अवकाश के बकाया भुगतान नहीं जा रहे हैं। उनमें से कई तो अपने इस बकाया भुगतान की आशा में इस दुनिया से ही उठ गये।
यूनियन के महासचिव धर्मवीर चौधरी ने अपने सम्बोधन में रोडवेज प्रबंधन से आर्टिजन ग्रेड प्रथम की छठे वेतनमान में ग्रेड पे 2400 से 2800 करने, नॉन आईटीआई आर्टीजन को जूनियर फोरमैन के पद तक पदोन्नति देने, स्थाई आदेश से शासित महिला कामगारों को चाइल्ड केयर लीव देने, स्थाई आदेश से नियंत्रित कामगारों को प्रति वर्ष 30 दिवस के उपार्जित अवकाश देने, चालकों के लिये पदोन्नति के पद सृजित करने आदि मांगों को समय रहते स्वीकार करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि रोडवेज प्रबंधन की ओर से ज्यादा विलम्ब करने पर कामगारों का आक्रोश बढ़ेगा, जिसके कारण यूनियन को बड़ा आंदोलन करने पर विचार करना पड़ेगा।
धरने को हरगोविंद शर्मा, आनंद चौधरी, राजेंद्र सिंह सोलंकी, मदन गोपाल विश्नोई, अनील कटारिया, बूटा सिंह एवं चंद्र सिंह भूकर ने भी सम्बोधित किया। धरने की अध्यक्षता यूनियन के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष कृष्ण गोपाल गुप्ता ने की।
