राजेश कुमावत, indireporter.com
महान प्रेरक बलिदान-श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी’ पुस्तक पर परिचर्चा
बलिदान जीवन मूल्यों का आधार है: मनोज कुमार
जयपुर। अखिल भारतीय साहित्य परिषद, जयपुर की ओर से गुरु तेग बहादुर साहिब जी के 350वें बलिदान दिवस के अवसर पर डॉ मंजीत कौर की पुस्तक “महान प्रेरक बलिदान – श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी” पर पुस्तक पाठक संवाद एवं परिचर्चा का आयोजन राजकीय महाराजा सार्वजनिक मंडल पुस्तकालय, चौड़ा रास्ता, जयपुर में किया गया।
कार्यक्रम के अतिथियों में मुख्य वक्ता मनोज कुमार, संगठन मंत्री, अखिल भारतीय साहित्य परिषद; इंदुशेखर तत्पुरुष, अखिल भारतीय साहित्य परिषद; डॉ मंजीत कौर, लेखिका; केशव शर्मा, क्षेत्रीय महामंत्री रहे। कार्यक्रम में मंच संचालन विकास तिवाड़ी परिचय मधुसूदन सिंह देवल ने दिया।
कार्यक्रम में क्षेत्रीय संगठन मंत्री राजस्थान डॉ विपिन कुमार, क्षेत्रीय प्रचार प्रमुख डॉ महावीर कुमावत, पुस्तकालय के अध्यक्ष सहित अनेक पाठक उपस्थित रहे।
मुख्य वक्ता मनोज कुमार ने कहा—
“बलिदान ही जीवन मूल्यों का आधार है। बलिदान के कारण ही देश, धर्म, संस्कृति और समाज जीवंत बने हुए हैं। बलिदान अपने आप में अनुपम, अतुलनीय और अद्भुत है—यही हमारी संस्कृति का संवाहक है।”
उन्होंने आगे कहा—
“हम सभी को प्रतिदिन उन अनगिनत बलिदानों को स्मरण रखना चाहिए, जिनकी बदौलत समाज में जागृति है और संगठन स्थापित हैं।”
अपने संबोधन में इंदुशेखर तत्पुरुष ने कहा कि गुरु तेग बहादुर का जीवन भारतीय सांस्कृतिक चेतना का सर्वोच्च उदाहरण है। उनका बलिदान केवल धर्म-संरक्षण का प्रतीक नहीं, बल्कि मानवाधिकारों और स्वतंत्रता के मानवीय मूल्य का वैश्विक संदेश भी है।
उन्होंने कहा कि ऐसी पुस्तकों और संवादों से समाज में वैचारिक शक्ति और राष्ट्रीय एकात्मता का विस्तार होता है।
लेखिका डॉ मंजीत कौर ने बताया कि गुरु तेग बहादुर साहिब जी गुरु कैसे बने—इसका ऐतिहासिक और आध्यात्मिक संदर्भ पुस्तक में विस्तार से प्रस्तुत किया गया है।
उन्होंने कहा—
“गुरु साहिब का बलिदान केवल इतिहास नहीं, बल्कि मानवता, धार्मिक स्वतंत्रता और सत्य की रक्षा का अनन्त संदेश है। आज यह बलिदान और भी अधिक प्रासंगिक है।”
उपस्थित पाठकों ने गहन मनोयोग से डॉ मंजीत कौर के संवाद और विचार सुने, तथा पुस्तक के अनेक आयामों पर उनसे प्रश्न पूछे, जिसका जवाब डॉ मंजीत कौर ने बड़े ही प्रभावी ढंग से दिया।
क्षेत्रीय संगठन मंत्री डॉ विपिन कुमार ने पुस्तक चर्चा को आगे बढ़ाते हुए गुरु तेग बहादुर साहिब जी के गुरु परंपरा में आगे बढ़ने के विचार साझा किए।
परिचर्चा के अंत में पाठकों ने गुरु तेगबहादुर साहिब जी के जीवन, त्याग और प्रेरक प्रसंगों पर विचार एवं संवाद के लिए लेखिका का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

सुन्दर एवं सारग्राही समाचार।👍🙏