शिव वर्मा सीनियर जर्नलिस्ट जोधपुर
“मिर्ची बड़ा” जोधपुर की अपनी एक पहचान है… जिस प्रकार “बीकानेरी भुजिया” बीकानेर के अलावा कहीं ओर वैसे नहीं बनते (जल वायु का प्रभाव है), ठीक उसी प्रकार मिर्चीबड़ा भी जोधपुर के अलावा और कहीं भी उतना जायकेदार नही बनता है..
जोधपुर का “मिर्चीबड़ा” औषधि है !, किसी भी प्रकार का व्यायाम (शारीरीक श्रम, घूमना, जागिंग या जिम इत्यादि) “पसीना/स्वेद” निकालता है, जो शरीर मे अपच हानिकारक तत्व “गुर्दों” द्वारा “मूत्र” व मल मार्ग से नहीं निकलता, वो मिर्ची या मिर्चीबड़ा खाने से “पसीने” में निकलता है, जो कि शरीर को डिटॉक्स करके स्वस्थ रखता है.
“एसी”, कूलर, पंखे इत्यादि “पसीना” बनने ही नही देते इस कारण विभिन्न रोग होते है. पश्चिमी राजस्थान मे “गर्मी” अधिक रहती है, बिना श्रम के भी “पसीने” से तर होते रहते है, फिर भी अन्यों से अधिक स्वस्थ रहते है, कारण कि मारवाड़ में मिर्ची का प्रयोग अधिक होता है.
“पहले पाये का मिर्ची बड़ा” कम से कम सप्ताह मे “दो बार” तो खाना ही चाहिए और “पसीने” से “तर” होने चाहिए, फिर कोई “शारिरिक श्रम/ योग / भोग” की आवश्यकता नहीं रहेगी.
“मिर्चीबड़ा” का “भोग” अन्य स्वास्थ्यवर्धक “योगों ” से श्रेष्ट व “मानसिक तृप्ति कारक” है. खाने के बाद “थकान” नहीं होती, शरीर मे “स्फूर्ति”आती है.
अगर आपको तेज जुकाम है नाक में से पानी बह रहा हो तो एक मिर्ची बड़ा गरमा गरम मिर्ची के साथ खा लीजिए तो जो काम कोई गोली नही कर सकती वो काम एक मिर्चीबड़ा कर देगा.
बळबळतो मिर्चीबडों.. जोधपुर वालो के लिए तो संजीवनी है एक तरह की..👍
अब मौसम चाहे तपती चिलचिलाती धूप में 50+ डिग्री हो या मूसलाधार बारिश हो या कड़कड़ाती सर्दी हो, एक असली मारवाड़ी इसकी परवाह नहीं करता… तो देर किस बात की… आप भी उतरते पाये का मिर्चीबड़ा खाने के लिए अपनी पसंदीदा दुकान पर पहुंचिए..☺️
