एंटी करप्शन ब्यूरो ने कलेक्टर को ट्रेप करने के लिए डमी करेंसी नहीं दी और गरीब बेचारे ई-मित्र संचालक के लिए डमी करेंसी उपलब्ध करवाई
- एसीबी ने फागी में ई-मित्र संचालक को एक लाख रुपए की घूस लेते गिरफ्तार
- एसीबी की कार्रवाईयों में दोहरे मापदंड
श्रम विभाग से क्लेम पास करने की एवज में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने गुरुवार को फागी की लसाडिया ग्राम पंचायत में एक ई-मित्र संचालक को एक लाख रुपए की घूस लेेते गिरफ्तार कर लिया। आरोपी ई-मित्र संचालक विश्राम गुर्जर परिवादी को श्रम विभाग से क्लेम पास कराने के लिए एक लाख रुपए की घूस मांगकर परेशान कर रहा था। एसीबी के अधिकारी आरोपी से पूछताछ कर रहे है। खास बात है कि आरोपी विश्राम गुर्जर को ट्रेप कराने के लिए परिवादी के पास इतनी राशि नहीं थी। ऐसे में एसीबी ने आरोपी को ट्रेप करने के लिए परिवादी को 70 हजार रुपए की डमी करेंसी उपलब्ध कराई। जबकि दूदू के तत्कालीन कलेक्टर हनुमान मल ढ़ाका द्वारा 25 लाख रुपए की घूस मांगने के मामले में एसीबी ने परिवादी को डमी करेंसी उपलब्ध कराई। अगर परिवादी को एसीबी डमी करेंसी उपलब्ध करा देती तो एसीबी की ट्रेप की कार्रवाई की सूचना लीक नहीं होती और कलेक्टर को मुकदमा दर्ज करने से तीन दिन पहले ही एसीबी ट्रेप की कार्रवाई को अंजाम दे सकती थी। एसीबी के अधिकारियों द्वारा की जा रही ट्रेप की कार्रवाईयों में दोहरे मापदंड अपनाने से सवाल उठने लगे है।
जयपुर श्रमिक डायरी के आधार पर क्लेम पास होता है
एसीबी में पिछले दिनों एक परिवादी ने शिकायत की थी। आरोप था कि उसके पिता की मृत्यु होने पर श्रमिक डायरी के आधार पर श्रम विभाग से क्लेम पास करवाना था। इसके एवज में आरोपी विश्राम गुर्जर ई-मित्र संचालक एक लाख रुपए रिश्वत राशि की मांग कर परेशान कर रहा है। इस पर एसीबी जयपुर के डीआईजी रणधीर सिंह के सुपर विजन में एडिशनल एसपी संदीप सारस्वत के नेतृत्व में एक टीम बनाई और परिवादी की शिकायत का सत्यापन किया गया। शिकायत का सत्यापन होने पर गुरुवार को पुलिस निरीक्षक सज्जन कुमार ने फागी में ट्रैप की कार्रवाई को अंजाम दिया। परिवादी ने ई-मित्र संचालक विश्राम गुर्जर को एक लाख रुपए दिए। इसमें 30 हजार रुपए कैश थी। 70 हजार रुपए डमी करेंसी थी।
कलेक्टर के मामले में तीन दिन तक घूस की राशि के लिए इंतजार
एसीबी द्वारा दर्ज की गई एफआईआर की माने तो सत्यापन के दौरान आरोपी हनुमान मल ढ़ाका ने परिवादी 25 लाख रुपए की घूस की डिमांड की थी। बाद में घूस का सौदा 15 लाख रुपए हुआ था। परिवादी ने जब इतनी राशि नहीं होने की बात कही तो ढ़ाका ने कहा दो किश्तों में दे देना 750000-750000 लाख रुपए और मिठाई के डिब्बे में आवास पर लेकर आना। लेकिन परिवादी के पास घूस की राशि की व्यवस्था नहीं हुई तो एसीबी के अधिकारियों ने डमी करेंसी से ट्रेप की कार्रवाई को अंजाम नहीं दिया और तीन दिन तक इंतजार करते रहे। जबकि रिश्वत की बड़ी डिमांड पूरी करने एसीबी ने मंगवाए थे 1 करोड़ के डमी नोट और डमी नोट से एसीबी ने पहले भी ट्रेप की कार्रवाईयाें को अंजाम दिया था।
