राजेश कुमावत, indireporter.com
प्रमुख तीर्थ स्थल गलताजी में सरकारी हस्तक्षेप के बाद श्रद्धालुओं को पवित्र कुंड में स्नान भी नहीं करने दिया जा रहा।
पवित्र सावन माह में श्रद्धालु गलताजी में स्नान कर पुण्य प्राप्त करते हैं, इस अवसर को सरकारी अधिकारियों ने भी छीन लिया। धार्मिक स्थल गलताजी में तैनात पुलिसकर्मी किसी को भी पवित्र कुंड में स्नान नहीं करने दे रहे। पुरुष कुंड में तो प्रवेश द्वार पर ताला ही लगा दिया, जबकि जन।जनाना कुंड में एनडीआरएफ एवं वहां तैनात स्थानीय पुलिस किसी को भी कुंड में स्नान नहीं करने देती।
श्रद्धालु स्नान के लिए वहां तैनात सुरक्षाकर्मी से निवेदन करते हैं तो, वहां तैनात सुरक्षाकर्मी ऊपर का आदेश बताकर है, और लठ फटकार कर श्रद्धालुओं को भगा देते हैं। गलता जी आने वाले श्रद्धालु थोड़ा सा अप्रोच वाला है तो गलता जी की सीढ़िया में बैठकर जो पानी बहता हुआ आ रहा है उसमें स्नान कर सकता है। अन्यथा आम से श्रद्धालु गलताजी की सीढ़िया में भी चढ़ नहीं सकते।
पूर्व मंदिर प्रबंधन इस बात पर कोई बात करने को तैयार नहीं है। जबकि वहां तैनात पुलिसकर्मी सुरक्षा व्यवस्था की बात कह कर स्नान करने से साफ मना कर देते हैं।
गलताजी के सरकारी प्रबंधन पर सुप्रीम कोर्ट की मोहर जयपुर स्थित गलता पीठ का प्रबंधन और देखभाल राज्य सरकार ही करेगी
सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति अभय एस. ओका और न्यायमूर्ति ऑगस्टिन मसीह की पीठ ने राजस्थान हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश को बरकरार रखा है।
गलतापीठ के सरकारी प्रबंधन पर सुप्रीम कोर्ट की मोहर
जयपुर, प्रमुख धार्मिक स्थल गलताजी का प्रबंध और देखभाल राज्य सरकार ही करेगी, सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति अभय एस. ओका और न्यायमूर्ति ऑगस्टिन मसीह की पीठ ने राजस्थान हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश को बरकरार रखा है।
तीर्थ गलताजी पीठ के पूर्व महंत अवधेशाचार्य ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। उन्होंने 2 अगस्त को हाईकोर्ट की खंडपीठ के अंतरिम आदेश को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने 22 जुलाई को राज्य सरकार को मंदिर प्रशासन का नियंत्रण लेने का आदेश दिया था।
राजस्थान सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता शिव मंगल शर्मा ने अपीलकर्ता की याचिका का कड़ा विरोध किया। उन्होंने तर्क दिया कि राज्य देवस्थान विभाग ने मंदिर के प्रशासन की जिम्मेदारी संभाल ली है। राज्य सरकार वहां प्रभावी ढंग से सभी धार्मिक गतिविधियों का प्रबंधन कर रही है। मंदिर की उचित देखभाल भी विभाग कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत के आदेशों में हस्तक्षेप करने में अनिच्छा दिखाई तो अपीलकर्ता ने विशेष अनुमति याचिका वापस ले ली।

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बहुत अच्छी खबर है। आस्था के साथ खिलवाड़ हो रहा हे और इस पर कोई भी प्रसंज्ञान नहीं ले रहा है। मंदिर प्रशासन पर तो प्रशासन का विवाद है और इसके आमजन का कोई लेना-देना नहीं है एक धार्मिक स्थल को इस तरीके से बंद नहीं किया जा सकता है।।