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Reading: “भारतीय सेना ” का शुक्र, अब जिंदगी से शिकायत नहीं: कश्मीरी इशरत अख्तर, दिव्यांग अंतरराष्ट्रीय हैंडबॉल खिलाड़ी
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“भारतीय सेना ” का शुक्र, अब जिंदगी से शिकायत नहीं: कश्मीरी इशरत अख्तर, दिव्यांग अंतरराष्ट्रीय हैंडबॉल खिलाड़ी

Rajesh Kumawat
Last updated: September 23, 2024 11:11 am
Rajesh Kumawat Published September 23, 2024
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राजेश कुमावत, indireporter.com

“भारतीय सेना” का शुक्र है, जिंदगी से अब शिकायत नहीं

कश्मीर की दिव्यांग इशरत अख्तर सबसे फास्ट खेल हैंडबॉल में कर रही है, भारत का प्रतिनिधित्व

“पहला सुख निरोगी काया, दूसरा सुख पास में माया” वाली कहावत समय के हिसाब से बहुत पीछे रह गई है। भागवत गीता में भगवान कृष्ण ने कहा है कि ‘कर्म कर, फल की इच्छा मत कर’
जैसा कर्म करेगा वैसा फल देगा “भगवान”

ऐसी ही कहानी कश्मीर के बारामूला जिले की रहने वाले इशरत अख्तर (26 वर्षीय) की है। गुलाबी नगरी जयपुर के सवाई मानसिंह स्टेडियम में हैंडबॉल एसोसिएशन ऑफ इंडिया की ओर से आयोजित टीम सिलेक्शन कैंप में भाग लेने आइ कश्मीर बारामुला की इशरत अख्तर ने बताया कि, लगभग 10 साल पहले वह अपने घर की छत से नीचे गिर गई थी, होश आया और शरीर संभाल तो देखा, रीड की हड्डी चोट लग गई, जिमके कारण अपने कमरे में ही कैद हो कर रह गई, हस्ती खेलती जिंदगी पल भर में नर्क बनकर रह गई। चार बहनों में दूसरे नंबर की इशरत अख्तर की माँ का बचपन में ही इंतकाल हो गया था,

  • भारतीयसेना ने बदली इरशरत अख्तर की जिंदगी* दिव्यांग इशरत अख्तर ने बताया कि बारामूला के गांव में मुस्लिम लड़कियां खेलों से बहुत दूर रहती है, हमारे यहां लड़कियों पर अनेक तरह की पाबंदियां होती है। छत से गिरने के बाद मेरा पूरा जीवन बदल गया, मुझे कुछ नहीं मालूम क्या हुआ, मैरी रीड की हड्डी क्षतिग्रस्त हो गई और मेरा जीवन ही नर्क में बदल गया था।

श्रीनगर में दिव्यांग लोगों के लिए भारतीयसेना के सहयोग से एक एनजीओ चलता है, उस एनजीओ में अन्य दिव्यांग लोगों के दुखों को देखा तो मैं अपना दुख दर्द भूल गई। एनजीओ में रहने के बाद मैरी जिंदगी के सपने ही बदल गए।

भारतीयसेना ने मुझे एक नया जीवन दिया, उन्हीं के कारण मैं इस मुकाम पर पहुंची हूं, मैं “भारतीयसेना” को सलाम करती हूं! जो गांव वाले कभी मुझे ताने दिया करते थे, वही लोग अब मुझ पर गर्व महसूस करते हैं। मेरे परिजन भी मेरे खेलने से सब खुश हैं। मेरे कोच लुईस जॉर्ज और रिटायर्ड कर्नल आइसनओवर है।

श्रीनगर में एक तरह से लोगों के लिए गो है उससे मिली और उसके बाद मेरी जिंदगी के मायने ही बदल गए बचपन में अपनी मां को को देने वाली इरशाद अक्सर की आंखों में खुशी के आंसू नजर आए उसने इस एनजीओ का शुक्रिया अदा किया एनजीओ के पास जब उसने बाकी लोगों को देखा तो अपना गम भूल गई

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