राजेश कुमावत, indireporter.com
भारत ने COP29 में ग्लोबल साउथ को दी नई दिशा: इलेक्ट्रिक मोबिलिटी में सबसे आगे
अज़रबैजान, 20 नवंबर, जलवायु परिवर्तन पर बाकू में आयोजित COP29 शिखर सम्मेलन में भारत ने इलेक्ट्रिक मोबिलिटी में अपने लीडरशिप से सबका ध्यान खींचा है। यहां वी मीन बिजनेस पैवेलियन में आयोजित सत्र “इंडियाज इलेक्ट्रिक मोबिलिटी लीडरशिप: स्पॉटलाइट ईवी ट्रांजीशन पाथवेज फॉर द ग्लोबल साउथ” में भारत के सस्टेनेबल मोबिलिटी नेटवर्क ने जलवायु परिवर्तन को रोकने के लिए अपने नवाचार, साझेदारी और सहयोग की एक प्रेरक कहानी सामने रखी है। अपने इस प्रयोग से भारत ने यह साबित किया कि उसकी महत्वाकांक्षी सार्वजनिक नीतियों, निजी क्षेत्र की पहल और नए प्रयोगों तथा समावेशी होने की प्रतिबद्धता आज ग्लोबल साउथ को एक नई दिशा दे रही है। साथ ही इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने के लिए भारत विश्व में एक मानक स्थापित कर रहा है।
ट्रांसपोर्ट थीमैटिक डे पर आयोजित इस कार्यक्रम में इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने में भारत के प्रयासों को दिखाया गया। इलेक्ट्रिक वाहन मोबिलिटी सेक्टर को कार्बन मुक्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण समाधान है। ग्लोबल साउथ पृथ्वी का वह क्षेत्र है जो तेजी से हो रहे विकास और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से जूझ रहा है।
तेलंगाना का नवीनीकृत इलेक्ट्रिक-मोबिलिटी अभियान यहाँ सबके लिए चर्चा का विषय बना। उल्लेखनीय है कि तेलंगाना इलेक्ट्रिक बसों और तिपहिया वाहनों के निर्माण का केंद्र है।
तेलंगाना सरकार के उद्योग और वाणिज्य विभाग के ऑटोमोटिव और इलेक्ट्रिक वाहन के निदेशक गोपालकृष्णन वीसी ने कहा, “तेलंगाना इस बात से गौरव महसूस करता है कि वह भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी का केंद्र है।
कर्नाटक 2017 में इलेक्ट्रिक वाहन नीति शुरू करने वाला पहला भारतीय राज्य है। इसकी गिनती देश के सबसे बड़े ईवी पब्लिक बस फ्लीट के निर्माण और सञ्चालन वाले राज्यों में की जाती है। राज्य भर में व्यापक ईवी चार्जिंग नेटवर्क स्थापित किया है।
कर्नाटक सरकार के परिवहन सलाहकार सुमंत के. ने बताया कि कर्नाटक द्वारा इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को प्राथमिकता पर रखना एक स्थायी और समावेशी भविष्य के लिए उनकी प्रतिबद्धता को दिखता है। उन्होंने कहा, “विद्युतीकरण और न्यायसंगत श्रम दोनों पर सामान रूप से जोर देने के पीछे हमारा उद्देश्य एक ऐसा मोबिलिटी इकोसिस्टम बनाना है
भारत में आई इलेक्ट्रिक मोबिलिटी क्रांति एक पॉलिसी इकोसिस्टम द्वारा संचालित है। इसके साथ टाटा मोटर्स और JSW जैसी कंपनियों की इंडस्ट्री लीडरशिप भी इससे जुड़ कर अपना योगदान दे रही है। टाटा ने इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और बैटरी तकनीक में आगे बढ़कर काम किया है, वहीं JSW का बैटरी-ऐज-ए-सर्विस (BaaS) मॉडल सेवा में नवाचार कर के उपभोक्ताओं को इसे अपनाने के लिए आकर्षित किया है।
JSW समूह के उपाध्यक्ष स्वरूप बनर्जी के अनुसार सार्वजनिक-निजी भागीदारी दरअसल नवाचार और गुणवत्ता को बढ़ाती है,
भारत का विश्व को सन्देश
COP29 में क्लीन मोबिलिटी कलेक्टिव (CMC) के ग्लोबल कोऑर्डिनेटर, असलिहान टुमर ने कहा कि भारत की नीतियाँ इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने के लिए विश्व में मानक स्थापित कर रही हैं।
ग्लोबल साउथ और अन्य देशों के साथ सहयोग
इस सत्र ने एक वैश्विक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया, जिसमें दक्षिण ऑस्ट्रेलिया की जल राजदूत, कार्लीन मेवॉल्ड ने ग्रीन ग्रिड के लक्ष्यों को प्राप्त करने में रिन्यूवल एनर्जी की भूमिका पर जोर दिया, जो इलेक्ट्रिक वाहन का समर्थन करती है। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया-भारत द्विपक्षीय संबंध और महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति श्रृंखलाओं पर सहयोग को प्रोत्साहित करने पर अपनी बात रखी।
वहीं, लैटिन अमेरिका का प्रतिनिधित्व डोमिनिकन रिपब्लिक के राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन परिषद की पामेला आर्बेउ ने किया। उन्होंने व्यापक रूप से सक्रिय गतिशीलता, सार्वजनिक परिवहन, पहली और आखिरी मील की कनेक्टिविटी को जोड़ने वाले समग्र और एकीकृत गतिशीलता समाधान सुनिश्चित करने की जरूरत पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि ईवी को बदलाव प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा बनाना चाहिए।
पामेला आर्बेउ ने कहा, “हम मानते हैं कि परिवहन क्षेत्र में सही उपायों के साथ, हम स्वच्छ वायु गुणवत्ता प्राप्त कर सकते हैं और कुछ बीमारियों के बोझ को कम कर सकते हैं। हमने अपने राष्ट्रीय निर्धारित योगदानों में ई-मोबिलिटी से संबंधित चार शमन विकल्पों की पहचान पहले ही कर ली है।
कार्यक्रम के प्रमुख ऑर्गनाइजिंग पार्टनर, क्लाइमेट ग्रुप के सिस्टम-इंडिया के निदेशक अतुल मुदलियार ने कहा, “भारत में आया बदलाव यह बता रहा है कि साहसिक नीतियों, आपसी भागीदारी और समावेशिता को अपना कर काम करें तो ग्लोबल साउथ एक सस्टेनेबल मोबिलिटी सिस्टम बनाने में अग्रणी भूमिका निभा सकता है- एक ऐसा सिस्टम जो इस धरती और इस पर रहनेवाले लोगों, दोनों के लिए लाभकारी है।
