पुष्कर उपाध्याय, indireporter.com
महामना मालवीय मिशन, जयपुर द्वारा मालवीय जयन्ती धूमधाम से मनाई
जयपुर, भारत रत्न, महामना पं. मदन मोहन मालवीय जी की 163वीं जयन्ती, महामना मालवीय मिशन, द्वारा बड़ी लगन एवं उत्साह से आदर्श विद्या मंदिर, मानसरोवर, जयपुर में मनायी।
समारोह का उद्घाटन, कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, दिनेश मणिरत्नम, आर.एस.एस.के प्रान्तीय बौद्विक शिक्षण प्रमुख एवं प्रेमचन्द जी बेरवाल, आई. ए.एस., सेवानिवृत्त संभागीय आयुक्त, जयपुर द्वारा मालवीय की प्रतिमा पर माल्यार्पण व दीप प्रज्जवलित करके, किया गया।
उद्घाटन, मिशन के सदस्य, विद्या मंदिर के प्राचार्य व स्टाफ और जयपुर के अन्य प्रबुद्ध नागरिकों की गरिमामयी उपस्थिति में सम्पन्न हुआ।
मालवीय मिशन के अध्यक्ष, अनिरूद्ध सिंह, ने मालवीय जी की जीवनी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मालवीय जी का जन्मोत्सव हमें हर वर्ष इसलिये मनाते हैं कि उनके गुणों का अनुकरण व अनुसरण करके, उन्हें हम आत्मसात करें। उनके जीवन से हमें शिक्षा मिलती है कि मनुष्य जन्म से नहीं कर्म से महान बनता है।
मालवीय मिशन के उपाध्यक्ष नीरज गौड़ ने माननीय मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथि का परिचय, सम्मानित सभा को कराया।
मुख्य अतिथि, दिनेश मणिरत्नम ने बताया कि मालवीय जी एक बहुत ही कुशल वक्ता, लेखक, संपादक, प्रसिद्ध न्यायविद, समाज सुधारक एवं महान दूरदर्शी व्यक्ति थे। उन्होंने प्रसिद्ध चौरी-चौरा केस में, 156 स्वतंत्रता सेनानियों की, एक अंग्रेज जज के कोर्ट में कुशलता पूर्वक केस लड़कर, जान बचाई थी। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में भी ‘‘जी जान से’’ भाग लिया। उनसे प्रेरणा लेते हुए, हमें अपने जीवन में सुचिता लानी चाहिये।
प्रेमचन्द बेरवाल, विशिष्ठ अतिथि ने कहा कि मालवीय जी के जीवन से प्रेरणा लेते हुए, जीवन में अच्छे कर्म करें और अपनी संस्कृति को अपनाऐं।
मालवीय मिशन द्वारा विद्यालय के प्राधानाचार्य ओ.पी. शर्मा, प्राचार्य, सुनील अग्रवाल, भगवती प्रसाद शर्मा एवं अध्यापिकाओं को अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के अन्त में, श्री गिरधर गुप्ता, महामंत्री मालवीय मिशन ने माननीय मुख्य अतिथि, विशिष्ठ अतिथि, मिशन के श्री कृष्णकान्त पाराशर (पूर्व अध्यक्ष), कोषाध्यक्ष श्री कमलकान्त पाराशर, अन्य पदाधिकारी एवं सम्मानित सदस्यों, बी.एच.यू. एल्यूमनी के अध्यक्ष, विद्या मंदिर के संरक्षक, अध्यक्ष, प्राचार्य, स्टाफ के सदस्य, विद्यार्थी एवं उन सभी महानुभावों का, जिन्होंने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप में, कार्यक्रम को सफल बनाने में अपना योगदान दिया, को धन्यवाद दिया, कार्यक्रम का समापन राष्ट्र गान द्वारा हुआ।
