राजेश कुमावत, indireporter.com
प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा राय की किताब पर्सनल इज पोलिटिकल का हुआ लोकार्पण
जयपुर 21 जुलाई कनोडिया महिला महाविद्यालय में प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा रॉय की किताब पर्सनल इज पोलिटिकल का लोकार्पण हुआ लोकार्पण करने वालों मे योजना आयोग की पूर्व सदस्य साईदा हमीद, भारतीय प्रशासनिक सेवा के पूर्व अधिकारी एन के सिसोदिया, उच्चतम न्यायालय की वकील वृंदा ग्रोवर, ममता जेटली, नोरती बाई, आभा भैया, मानव अधिकार कार्यकर्ता कविता श्रीवास्तव रहे.
कार्यक्रम की शुरुआत कविता श्रीवास्तव ने अरुणा रॉय के जीवन के बारे में बात करते हुए अपने विचार रखे, जिसमें उन्होंने कहा कि किस प्रकार उनकी पहली मुलाकात इसी कनोडिया कॉलेज में हुई और उसके बाद फिर समाज कार्य एवं अनुसंधान केंद्र तिलोनिया में गए जब उनकी कोई राजनीतिक और सामाजिक समझ नहीं थी. उसके बाद अरुणा राय से प्रेरित होकर कविता श्रीवास्तव ने भी अपना पूरा जीवन मानव अधिकार और सामाजिक संघर्ष के लिए समर्पित कर दिया, किताब के बारे मे अरुणा राय ने कहा इसमे बहुत लोगों का योगदान और जो सामूहिक और व्यक्तिगत दोनों है कैसे इसे बाहर निकालूं बड़ा संकोच मन में था लेकिन ये बाहर आया है. उन्होंने कहा कि ये किताब पढ़कर लोग सोचने को मजबूर होंगे ऐसा मुझे लगता है. उन्होंने कहा मुझे गाँव के लोगों ने बहुत सिखाया है जिसमे से आज यहाँ पर नोरती बाई, बीला आज हैं और भी बहुत लोग है. प्रसिद्ध स्कॉलर साईदा हमीद ने किताब पर अपनी बात रखते हुए कहा कि यह किताब अरुण राय के न केवल जीवन बल्कि उसके साथ-साथ और महिला आंदोलन की भी झलक इसके अंदर दिखाई देती है. आता भैया जो लंबे समय से अरुण राय को जानते हैं ने किताब के बारे में बोलते हुए कहा कि यह किताब फेमिनिस्ट पर्सपेक्टिव से लिखी गई है जिसमें प्रक्रियाएं हैं कहानियाँ हैं. यह किताब इस तरीके से लिखी गई है कि इसे कोई भी समझ सकता है इसलिए सभी को इसे जरूर पढ़ना चाहिए.
किताब पर अपनी बात रखते हुए लेखन और सामाजिक कार्य से जुड़ी और लंबे समय से अरुणा रॉय को जानने पहचानने वाली ममता जेटली कहा कि किताब में सब कुछ है.
कार्यक्रम में उच्चतम न्यायालय की वकील वृंदा ग्रोवर ने अपनी बात रखते हुए कहा कि इस किताब में बहुत सारी चीज हैं जो हर वर्ग को सिखाने वाली है जिसमें विद्यार्थियों से लेकर समाज का हर वर्ग किस किताब से सीख सकता है. किताब पर अपनी बात रखते हुए पूर्व भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी और अरुणा रॉय के बैचमेट एन के सिसोदिया ने कहा कि हम सभी एक बात गर्व के साथ कह सकते हैं कि हम अरुणा रॉय के बैचमेट हैं इसके साथ-साथ उन्होंने कहा कि हमें हमेशा गर्व होता है बातचीत करते हैं तो कि हमारे बीच से कोई एक साथी जाकर के इस तरीके का संघर्ष पूर्ण जीवन जिया और वंचित तबके के लोगों की आवाज बनकर और उनकी आवाज को और बुलंद कर रहा है. किताब के बारे में अपनी बात रखते हुए नोरती बाई ने कहा कि शुरू में अरुणा जी हमारे गांव में आई उन्होंने महिलाओं के साथ मीटिंग की और पहले उन्होंने हमको संगठित करने में रुचि दिखाई और मदद की उसके बाद उन्होंने बहुत कुछ महिलाओं से सीखा और उसको बहुत आगे तक बढ़ाया उन्होंने अपने जीवन के बारे में भी एक टिप्पणी की कि मैं अनपढ़ होते हुए भी कंप्यूटर चलाई पंचायत को चलाई और महिलाओं को कंप्यूटर सिखाने का काम भी किया
किताब का आफ्टरवार्ड लिखने वाले मजदूर किसान शक्ति संगठन के संस्थापक सदस्य एवं अरुणा रॉय के साथी शंकर सिंह ने किताब के बारे में बोलते हुए कहा कि यह किताब पहले अभ्यास की गई है पहले इस तरह का जीवन जिया गया है और उसके बाद यह किताब लिखी गई है इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि इसे हर कोई पढ़े तथा निखिल ड़े ने कहा कि इस किताब में हम सब का जीवन भी समाहित है और जरूर लोग इस किताब को पढ़े. यह जो संघर्ष मजदूर किसान शक्ति संगठन कठिन परिस्थितियों में कर रहा है उसमें साथी जुड़े चाहे वे जिस भी रूप में जुड़ सकें.
अंत में प्रोफेसर मोहम्मद हसन एवं प्रसिद्ध पत्रकार शनि सेबस्टियन ने किताब पर अपनी टिप्पणी दी.
