दीपक शर्मा, indireporter.com
राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़े के समापन पर जागरूकता कार्यषाला आयोजित
ए.एन.एम. प्रषिक्षणार्थियों को समझाई नेत्रदान की बारीकियां
चिकित्सा विभाग एवं आई बैंक सोसायटी ऑफ राजस्थान का आयोजन
पाली, नेत्रदान के प्रति आमजन को जागरूक करने के उद्देष्य से सम्पूर्ण देष में हर वर्ष 25 अगस्त से 08 सितम्बर के दौरान आयोजित होने वाले ’’ राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा ’’ कार्यक्रम के अंतर्गत चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग तथा आई बैंक सोसायटी ऑफ राजस्थान,पाली चैप्टर के संयुक्त तत्वावधान में सोमवार को राजकीय बांगड़ चिकित्सालय स्थित ए.एन.एम. प्रषिक्षण केन्द्र,पाली के सभागार में एक जागरूकता कार्यषाला का आयोजन किया गया।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. विकास मारवाल ने बताया कि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा राष्ट्रीय अंधता निवारण कार्यक्रम के अंतर्गत आई बैंक सोसायटी ऑफ राजस्थान,पाली चैप्टर के सहयोग से ए.एन.एम. प्रषिक्षण प्राप्त कर रही प्रषिक्षणार्थियों के लिये सोमवार को 40 वें राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़े के समापन पर आयोजित जागरूकता कार्यषाला के दौरान नेत्रदान के बारे में सम्पूर्ण प्रक्रिया की जानकारी विषय विषेषज्ञों द्वारा प्रदान की गई है,ताकि वे अपने अपने क्षेत्र में आमजन को इस बारे में जागरूक कर सकें तथा नेत्रदान के महत्व के बारे में आमजन को पर्याप्त एवं सटीक जानकारी प्रदान कर सकें।
सोमवार को जागरूकता कार्यषाला में चिकित्सा विभाग के पूर्व निदेषक डॉ. आर.के. गर्ग ने जानकारी प्रदान करते हुये बताया कि नेत्रदान को सभी धर्मों में मान्यता प्रदान की गई है, नेत्रदान मृत्यु के उपरांत ही सम्भव है, एक व्यक्ति द्वारा नेत्रदान करने से दो नेत्रहीनों को ऑंखों की रोषनी मिल सकती है। नेत्रदान किसी भी धर्म, सम्प्रदाय,जाति, आयु, लिंग का व्यक्ति कर सकता है, उसका चाहे कोई भी रक्त समूह हो,आवष्यकता इस बात की है कि हम उन्हें सही जानकारी देकर उन्हें जागरूक करें ताकि नेत्रदान को बढावा मिल सके तथा जरूरतमंद नेत्रहीन व्यक्ति इस दुनिया के रंगों को देख सके।
कार्यषाला में अपने विचार रखते हुये राजकीय बांगड़ चिकित्सालय के नेत्ररोग विभागाध्यक्ष डॉ. विपुल नागर ने प्रषिक्षणार्थियों से कहा कि वे नेत्रदान हेतु लोगों को प्रेरित करें । नेत्रदान के बारे में उन्होंनें बताया कि जिनका मोतियाबिन्द का ऑपरेषन हुआ है,वे भी नेत्रदान कर सकते हैं, जो लेग नजर का चष्मा लगाते हैं,वे भी नेत्रदान कर सकते हैं, जिनको मधुमेह, उच्च रक्तचाप, सांस की बीमारी है, वो लोग भी आसानी से मृत्योपरांत नेत्रदान कर सकते हैं। जिन लोगों ने नेत्रदान हेतु घोषणा नहीं की है, उनके परिवार के लोगों की सहमति के आधार पर भी नेत्रदान करवाया जा सकता है। उन्होंने सभी सहभागी प्रषिक्षणार्थियों को नेत्रदान की शपथ दिलवाई।
कार्यषाला में ए.एन.एम. प्रशिक्षण केन्द्र के प्रधानाचार्य के. सी. सैनी ने जानकारी देते हुये कहा कि नेत्रदान की प्रक्रिया मृत्यु के छः से आठ घंटे के मध्य पूर्ण होनी अनिवार्य है, नेत्रदान हेतु शव को कहीं लेकर जाने की आवष्यकता नहीं है, इस हेतु आई बैंक सोसायटी ऑफ राजस्थान के लोग मृतक के घर जाकर नेत्रदान की प्रक्रिया पूर्ण करते हैं, नेत्रदान में शव की पूरी ऑंख नहीं निकाली जाती है, बल्कि सिर्फ ऑंख के ऊपर की झिल्ली,जिसे कोर्निया कहते हैं, ही निकाली जाती है,जिससे शव में किसी प्रकार की विकृति नहीं होती है।
आई बैंक सोसायटी ऑफ राजस्थान ,पाली चैप्टर के सचिव केवल चंद कवाड़ ने संस्था के बारे में पूर्ण जानकारी प्रदान की तथा नेत्रदान के बारे में बताया कि नेत्रदान की सम्पूर्ण प्रक्रिया में सिर्फ 15 से 20 मिनट का ही समय लगता है, नेत्रदान करने वाले परिवार के लोगों को चाहिये कि नेत्रदान नहीं होने तक शव की ऑंखों ने गीली पट्टी लगा कर रखें, शव के उपर पंखा बन्द कर दें ताकि शव का कोर्निया खराब ना हो सके। संस्था के अध्यक्ष हुकमी चंद मेहता ने बताया कि नेत्रदान के बारे में सूचना देने हेतु बांगड़ चिकित्सालय परिसर में संचालित संचेती धर्मषाला में आई बैंक सोसायटी ऑफ राजस्थान के कार्यालय में सूचना दी जा सकती है या फिर फोन नम्बर 9252066000 या 9414123335 पर भी सम्पर्क किया जा सकता है।
कार्यक्रम के दौरान नेत्ररोग विभाग के डॉ. सुनैना हटेला, डॉ. मुकेष गोदारा, डॉ. सुभाष सैनी, प्रषिक्षक पारसमल कुमावत, षिवनारायण दाधीच, पीराराम सोलंकी नेत्र सहायक, आई बैंक सोसायटी की डॉ. प्रतीभा गर्ग, गौतम चंद रांका, हेमन्त चौपड़ा, जहूर खान, एवं राजेष सहित लगभग 80 ए.एन.एम. प्रषिक्षणार्थी तथा 60 बीएससी नर्सिंग प्रषिक्षणार्थी उपस्थित रहे। कार्यषाला के अंत में केन्द्र के प्रधानाचार्य के.सी. सैनी ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया।
