राजकुमार पारीक, indireporter.com
भारत के स्व की पुकार: सनातन चेतना के साथ एक मंच पर जुटा हिन्दू समाज
ब्रह्मपुरी बस्ती में धर्म, संस्कृति और राष्ट्रभाव का संगम, गूंजा सनातन स्वाभिमान
जयपुर। सनातन संस्कृति, धर्म, आस्था और विश्वास का अद्भुत संगम 8 फरवरी को ब्रह्मपुरी बस्ती स्थित वीर हनुमान मंदिर परिसर में देखने को मिला, जहां विराट हिन्दू सम्मेलन श्रद्धा, भक्ति और राष्ट्रीय चेतना के भाव के साथ भव्य रूप से संपन्न हुआ। इस आयोजन ने न केवल हिन्दू समाज को एक सूत्र में बांधा, बल्कि सनातन परंपराओं के प्रति जनमानस की आस्था को भी और अधिक सशक्त किया।
501 महिलाओं की कलश यात्रा से शुभारंभ :
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः 11 बजे भव्य कलश यात्रा से हुआ। आयोजन समिति के अध्यक्ष और नहर के गणेश जी मंदिर के महंत पंडित जय कुमार शर्मा सहित आयोजन समिति के पदाधिकारियों ने मातृशक्ति को सिर पर प्रधान कलश धारण कराकर यात्रा का शुभारंभ किया। 501 महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में सिर पर कलश धारण कर, डीजे पर गूंजते भजनों और “जय श्रीराम” के उद्घोष के साथ रवाना हुई। कलश यात्रा के आगे वीरांगनाओं और महापुरुषों के वेश में बालक-बालिकाएं हाथों में तलवार और भाले लेकर चल रहे थे। वहीं पुरुष शुभ्र वस्त्रों में भगवा साफा धारण कर हाथों में भगवा ध्वज लिए चल रहे थे। मार्ग में जगह-जगह पुष्प वर्षा कर हिन्दू समाज ने यात्रा का स्वागत किया। पूरा वातावरण भक्ति, श्रद्धा और सनातन चेतना से सराबोर नजर आया।
ओजस्वी कविताओं और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां :
कलश यात्रा के पश्चात वीर हनुमान मंदिर परिसर में दोपहर 2 बजे विराट हिन्दू सम्मेलन का आयोजन हुआ। अतिथियों ने दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। साथ ही वेद स्वाध्याय पीठ के विद्यार्थियों ने सस्वर स्वस्ति वाचन किया। सम्मेलन में वीर रस के राष्ट्रीय कवि डॉ. अभिषेक अमर, अमित आजाद और नवीन कानूनगो ने अपनी ओजस्वी कविताओं से धर्म, राष्ट्र और सनातन मूल्यों की अलख जगाई। उनकी कविताओं ने उपस्थित जनसमूह में आत्मगौरव और सांस्कृतिक चेतना का संचार किया। वेद स्वाध्याय पीठ (गुरुकुल) के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने भारतीय संस्कृति की गरिमा को मंच पर जीवंत कर दिया। तलवारबाजी का प्रदर्शन शक्ति, शौर्य और आत्मरक्षा के संदेश के साथ विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। वेद स्वाध्याय की बालिकाओं ने महिषा मर्दिनी का सामूहिक गान किया।
इंडियन आइडल फेम आयुद्ध दवे ने देशभक्ति गीतों की प्रस्तुति देकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। मंच संचालन कर रही एंकर राखी शुक्ला ने संस्कृत श्लोकों, ओजस्वी और वीरता से परिपूर्ण वाक्यों तथा नपे-तुले प्रभावी शब्दों के माध्यम से पूरे कार्यक्रम को सधे हुए प्रवाह में बांधे रखा। उनकी ऊर्जावान और संस्कारित प्रस्तुति ने आमजन को अंत तक कार्यक्रम से जोड़े रखा।
सनातन जीवन पद्धति ही समाज की शक्ति : आचार्य राजेश्वर
सम्मेलन में मुख्य अतिथि आचार्य राजेश्वर ने भारत की प्राचीन सनातन संस्कृति, धर्म और आध्यात्मिक मूल्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सनातन जीवन पद्धति ही समाज को संस्कारित, सशक्त और एकजुट बनाने का आधार है। आचार्य राजेश्वर ने सभी को अपने घरों और समाज में पारंपरिक मूल्यों को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि धर्म और संस्कृति का पालन केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सामाजिक जीवन को भी सकारात्मक दिशा प्रदान करता है। सम्मेलन में उपस्थित लोगों को संदेश दिया कि सनातन जीवन शैली से मानसिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विकास संभव है। उन्होंने युवाओं को संस्कारों के साथ अपने जीवन को प्रेरित करने और समाज में सशक्त योगदान देने की प्रेरणा दी। आचार्य ने कहा कि धर्म और संस्कृति का सम्मान करते हुए ही राष्ट्र की प्रगति और समाज की समरसता सुनिश्चित की जा सकती है।
पंच परिवर्तन से समाज का नव निर्माण :
सम्मेलन के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रचारक कैलाश चंद जी ने पंच परिवर्तन, स्व का बोध, सनातन संस्कृति और हिंदू समाज में जागरूकता एवं एकजुटता पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि समाज में सुधार और सामूहिक शक्ति तभी संभव है जब व्यक्ति अपने भीतर जागरूकता और आत्मबोध विकसित करे। उन्होंने पंच परिवर्तन के माध्यम से जीवन में अनुशासन, सत्यनिष्ठा, संयम और संस्कारों के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति समाज को नैतिक, आध्यात्मिक और सामाजिक रूप से मजबूत बनाती है। उन्होंने सम्मेलन में उपस्थित लोगों से आग्रह किया कि वे अपने परिवार और समाज में संस्कृति और परंपराओं को आगे बढ़ाएं। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज की एकजुटता, अपनेपन और संस्कृति का आदर ही राष्ट्र की असली ताकत और भविष्य की पहचान है।
प्रतिभाओं का सम्मान, हनुमान चालीसा से समापन :
सम्मेलन में शिक्षा, खेल और सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले मेधावी छात्रों और प्रतिभावान खिलाड़ियों का सम्मान कर उन्हें प्रेरित किया गया। सम्मेलन का समापन सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ के साथ हुआ, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने एक स्वर में सहभागिता कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
सेवा, समरसता और पर्यावरण संरक्षण का संदेश :
नहर के गणेश मंदिर में ब्रह्मपुरी बस्ती द्वारा सर्व हिन्दू समाज के लिए पंगत प्रसादी का आयोजन किया गया, जिसमें सेवा का अनुपम उदाहरण देखने को मिला। यहाँ ऊँच-नीच और जातीय भेदभाव को भूलकर सभी ने मिल-जुलकर भोजन ग्रहण किया। पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए पूरे कार्यक्रम में प्लास्टिक का उपयोग नहीं किया गया। पंगत प्रसादी में पत्तों के बने पत्तल-दोने, लकड़ी की चम्मच और पानी पिलाने के लिए तांबे व स्टील के बर्तनों का उपयोग किया गया, जिससे संस्कृति, सेवा और प्रकृति के प्रति जागरूकता का संदेश फैलाया गया।

शास्त्र से पहले, शास्त्र जरूरी !
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